किन्नौर
हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-5 (NH-5) पर टापरी-चोलिंग के समीप सतलुज नदी पर बना महत्वपूर्ण चोलिंग बैली ब्रिज अचानक टूटकर नदी में समा गया।
हादसा उस समय हुआ जब बजरी से भरा एक ओवरलोड डंपर ट्रक पुल के ठीक बीच में पहुंचा। लोहे की प्लेटों से बना यह बिना पिलर का बैली ब्रिज ट्रक का भारी वजन सहन नहीं कर पाया और दोनों ओर से क्षतिग्रस्त होकर सीधे नीचे जा गिरा, जिसके साथ ट्रक भी सतलुज नदी में गिर गया।
राहत की बात यह रही कि करछम-वांगतू परियोजना की टनल के कारण नदी का जलस्तर कम था, जिससे चालक को केवल हल्की चोटें आईं और एक बड़ा हादसा टल गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ समय पहले ही इस पुल की मरम्मत की गई थी, फिर भी भारी वाहनों को लेकर लगातार आशंका बनी हुई थी।
तीन जिलों का संपर्क टूटा, पर्यटकों और स्थानीय लोगों की बढ़ी मुश्किलें
इस चोलिंग पुल के पूरी तरह नष्ट होने से लाहुल-स्पीति के काजा, शिमला और किन्नौर जिले का आपस में संपर्क कट गया है। वर्तमान में चरम पर चल रहे पर्यटन सीजन के बीच इस मुख्य मार्ग के बाधित होने से देश-विदेश से आए पर्यटकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इसके अलावा, कई स्थानीय गांवों का संपर्क टूटने से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं। घटना के तुरंत बाद प्रशासन ने एहतियात के तौर पर इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही को रोक दिया है, जिससे हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
वैकल्पिक मार्ग से करना पड़ रहा अतिरिक्त सफर, सेब सीजन को लेकर बढ़ी चिंता
यातायात को सुचारू रखने के लिए प्रशासन ने कुछ घंटों बाद वाहनों को उरनी-ढांक वैकल्पिक मार्ग से भेजना शुरू कर दिया है। हालांकि, इस नए रास्ते से यात्रियों को करीब 8 से 10 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे यात्रा में लगभग एक घंटे का ज्यादा समय लग रहा है।
इस बीच, क्षेत्र के बागवानों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं क्योंकि अगस्त महीने से किन्नौर का मुख्य सेब सीजन शुरू होने वाला है। बागवानों का मानना है कि अगर समय रहते पुल का पुनर्निर्माण या पक्का समाधान नहीं किया गया, तो सेब को मंडियों तक पहुंचाने में भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
फिलहाल, प्रशासन ने लोगों से सतर्कता बरतने की अपील की है और पुल की क्षति का आकलन कर जल्द कदम उठाने का आश्वासन दिया है।