उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री बोले— 2023 से अब तक कर्मचारियों और पेंशनरों को 313 करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय लाभ, निजी बस ऑपरेटर भी सरकार के समर्थन में आए
शिमला।
एचआरटीसी कर्मचारियों की प्रस्तावित हड़ताल को लेकर प्रदेश सरकार ने अपना रुख और स्पष्ट कर दिया है। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा है कि हिमाचल पथ परिवहन निगम के कर्मचारी कानून को अपने हाथ में न लें। सरकार द्वारा एस्मा (ESMA) लागू किया जा चुका है और हड़ताल पर जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि जैसे अन्य आवश्यक सेवाएं आम जनता के लिए महत्वपूर्ण हैं, उसी प्रकार परिवहन निगम की सेवाएं भी अनिवार्य हैं। सरकार का प्रयास है कि किसी भी स्थिति में प्रदेशवासियों को परेशानी का सामना न करना पड़े। आवश्यकता पड़ने पर चालकों की भर्ती कर परिवहन सेवाओं को सुचारू रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि हड़ताल किसी भी समस्या का समाधान नहीं है।
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि एक जनवरी 2023 से 30 मार्च 2026 तक एचआरटीसी पेंशनरों को कुल 239.45 करोड़ रुपये के वित्तीय लाभ प्रदान किए गए हैं। इसमें पेंशन, ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट, चिकित्सा प्रतिपूर्ति, पेंशन भत्ते और संशोधित पेंशन के भुगतान शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि इसी अवधि में कर्मचारियों को भी 74.39 करोड़ रुपये के वित्तीय लाभ दिए गए हैं। इनमें ओवरटाइम और रात्रि भत्ता, महंगाई भत्ता, चिकित्सा प्रतिपूर्ति और वेतन सहित अन्य बकाया राशि का भुगतान शामिल है।
मुकेश अग्निहोत्री ने बताया कि वर्ष 2023 से 2025 के बीच 2,198 कर्मचारियों को अनुबंध सेवाओं से नियमित किया गया है, जबकि 691 नई नियुक्तियां भी की गई हैं। इनमें कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से नियुक्त परिचालक और अन्य श्रेणियों के कर्मचारी शामिल हैं।
इस बीच प्रदेश निजी बस ऑपरेटर संघ भी सरकार के समर्थन में सामने आया है। संघ ने घोषणा की है कि यदि एचआरटीसी की सेवाएं प्रभावित होती हैं तो वह अतिरिक्त बस सेवाएं संचालित करेगा, ताकि विद्यार्थियों, परीक्षार्थियों, दिहाड़ी मजदूरों और आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष राजेश पराशर और महासचिव रमेश कमल ने संयुक्त बयान में कहा कि प्रदेश हित सर्वोपरि है और आवश्यकता पड़ने पर निजी बस ऑपरेटर पूरी जिम्मेदारी के साथ सेवाएं देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जिन क्षेत्रों में परिवहन सेवाओं की जरूरत होगी, वहां निजी ऑपरेटर तत्काल सेवाएं उपलब्ध कराएंगे।
सरकार और निजी बस ऑपरेटरों के इस रुख से स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि प्रस्तावित हड़ताल के बावजूद प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बनाए रखने के लिए व्यापक तैयारियां की जा चुकी हैं।
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