शिमला
देश की रक्षा के लिए हमेशा अग्रणी रहने वाली हिमाचल प्रदेश की वीरभूमि के लिए एक बार फिर गर्व का पल आया है। नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित रक्षा अलंकरण समारोह (Defense Investiture Ceremony) के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हिमाचल प्रदेश के पांच जांबाजों को उनके अदम्य साहस और असाधारण वीरता के लिए राष्ट्रीय सम्मान
से नवाजा है। इस भव्य समारोह में राज्य के एक वीर सैनिक को वीर चक्र और चार अन्य जांबाजों को शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया।
सतीश कुमार को 'वीर चक्र', चार वीरों को 'शौर्य चक्र'
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, सेना में अदम्य साहस का परिचय देने वाले नायब सूबेदार सतीश कुमार को देश के तीसरे सबसे बड़े युद्धकालीन वीरता पुरस्कार 'वीर चक्र' से सम्मानित किया गया।
उनके अलावा हिमाचल के चार अन्य वीर जवानों को शांतिकाल के प्रतिष्ठित वीरता पुरस्कार 'शौर्य चक्र' से अलंकृत किया गया। इन जांबाजों ने आतंकवाद विरोधी अभियानों और सीमा सुरक्षा के दौरान अपनी जान की परवाह न करते हुए दुश्मनों के दांत खट्टे किए थे।
अदम्य साहस और शौर्य की अमर गाथा
देश की रक्षा के लिए अपनी जान की बाजी लगाने वाले हिमाचल के इन जांबाजों की वीरता की कहानी बेहद प्रेरणादायक है। इस भव्य समारोह में नायब सूबेदार सतीश कुमार को एक बेहद कठिन सामरिक अभियान के दौरान अद्भुत वीरता, सूझबूझ और अनुकरणीय साहस का प्रदर्शन करने के लिए देश के प्रतिष्ठित 'वीर चक्र' से नवाजा गया।
वहीं दूसरी ओर, कैप्टन योगेंद्र ठाकुर एवं उनके साथी वीरों को आतंकवाद विरोधी अभियानों और बेहद चुनौतीपूर्ण सैन्य ऑपरेशन्स में अपनी जान जोखिम में डालकर दुश्मनों के मंसूबों को नाकाम करने के लिए 'शौर्य चक्र' से अलंकृत किया गया।
इन दोनों ही जांबाजों ने विपरीत परिस्थितियों में भी हार न मानते हुए भारतीय सेना की सर्वोच्च परंपराओं को कायम रखा और देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया।
देश की सुरक्षा में हिमाचल का सर्वोच्च योगदान
हिमाचल प्रदेश देश की आबादी का एक छोटा सा हिस्सा है, लेकिन भारतीय सेना में शौर्य प्रदर्शन के मामले में इस राज्य का योगदान हमेशा सर्वोच्च रहा है। कारगिल युद्ध से लेकर देश के हर मोर्चे पर यहाँ के जवानों ने अपनी वीरता का लोहा मनवाया है।
इस गौरवपूर्ण अवसर पर सेना के शीर्ष कमांडर, केंद्रीय मंत्री और सम्मानित होने वाले वीरों के परिजन भी मौजूद रहे, जिनकी आंखें अपने बेटों के सीने पर पदक सजते देख गर्व से नम हो गईं।