हिमाचल में शिटाके मशरूम की नई किस्मों पर शोध, DMRC सोलन तलाश रहा खेती की संभावनाएं

हिमाचल में शिटाके मशरूम की नई किस्मों पर शोध, DMRC सोलन तलाश रहा खेती की संभावनाएं
हिमाचल में शिटाके मशरूम की नई किस्मों पर शोध, DMRC सोलन तलाश रहा खेती की संभावनाएं

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कम, मध्यम और अधिक तापमान के अनुकूल किस्मों की पहचान पर जोर, प्रदेश के अलग-अलग जलवायु क्षेत्रों में मशरूम उत्पादन को मिल सकती है नई दिशा

हिमाचल प्रदेश में मशरूम उत्पादन की संभावनाओं को बढ़ाने और किसानों के लिए नए विकल्प तलाशने की दिशा में मशरूम अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र (DMRC), सोलन में शोध कार्य किया जा रहा है।

इसी कड़ी में केंद्र की ओर से शिटाके (Shiitake) मशरूम की विभिन्न प्रजातियों और किस्मों का अध्ययन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ऐसी किस्मों की पहचान करना है, जिन्हें प्रदेश के अलग-अलग तापमान और जलवायु परिस्थितियों में उगाया जा सके।

DMRC सोलन के निदेशक बी.एल. अत्री के अनुसार, केंद्र में मशरूम की विभिन्न प्रजातियों की उत्पादन क्षमता और उनके अनुकूल वातावरण को समझने के लिए अध्ययन किया जा रहा है। शिटाके मशरूम की अलग-अलग स्ट्रेन पर केंद्रित यह शोध हिमाचल प्रदेश के विविध जलवायु क्षेत्रों में इसकी खेती की संभावनाओं का आकलन करने में मदद कर सकता है।

कम, मध्यम और अधिक तापमान के अनुकूल किस्मों पर फोकस

शिटाके मशरूम की खेती में तापमान की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसकी विभिन्न किस्मों की वृद्धि और फलन के लिए अलग-अलग परिस्थितियों की आवश्यकता हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए DMRC सोलन में कम, मध्यम और अधिक तापमान के अनुकूल किस्मों की पहचान करने तथा उनके प्रदर्शन का अध्ययन करने पर जोर दिया जा रहा है।

शोध के माध्यम से यह समझने का प्रयास किया जा रहा है कि कौन-सी स्ट्रेन विशेष तापमान परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। इससे भविष्य में हिमाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों की जलवायु के अनुरूप मशरूम उत्पादन की तकनीक विकसित करने की संभावनाएं तलाशने में मदद मिलेगी।

14 से 20 डिग्री सेल्सियस तापमान में खेती की संभावनाएं

शिटाके मशरूम की खेती के लिए सामान्यतः लगभग 14 से 20 डिग्री सेल्सियस तापमान को अनुकूल परिस्थितियों में शामिल किया जाता है। हालांकि, इसकी वास्तविक तापमान संबंधी जरूरत मशरूम की किस्म, उत्पादन के चरण और अन्य पर्यावरणीय परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

DMRC सोलन में अलग-अलग तापमान के अनुकूल स्ट्रेन पर किए जा रहे शोध से यह समझने में सहायता मिल सकती है कि विभिन्न परिस्थितियों में इनकी वृद्धि और उत्पादन क्षमता कैसी रहती है। इससे उन क्षेत्रों में भी इसकी खेती की संभावनाओं का आकलन किया जा सकेगा, जहां मौसम और तापमान की परिस्थितियां अलग-अलग हैं।

प्रदेश के अलग-अलग जलवायु क्षेत्रों के लिए नए विकल्प

हिमाचल प्रदेश में ऊंचाई के अनुसार तापमान और मौसम में काफी अंतर देखने को मिलता है। ऐसे में जरूरी नहीं कि मशरूम की एक ही किस्म प्रदेश के सभी क्षेत्रों में समान प्रदर्शन करे। यदि स्थानीय जलवायु के अनुकूल किस्मों की पहचान होती है, तो किसानों को अपने क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुसार बेहतर विकल्प चुनने में मदद मिल सकती है।

शिटाके मशरूम की विभिन्न स्ट्रेन पर किया जा रहा अध्ययन इसी दिशा में महत्वपूर्ण है। इसके जरिए भविष्य में अलग-अलग जलवायु क्षेत्रों के अनुरूप उत्पादन तकनीक विकसित करने की संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं। हालांकि, व्यावसायिक खेती के लिए किसी भी किस्म की उपयुक्तता उसकी उपज, गुणवत्ता, उत्पादन लागत और स्थानीय परिस्थितियों में किए गए परीक्षणों पर निर्भर करेगी।

मशरूम अनुसंधान से किसानों को मिल सकती है नई जानकारी

मशरूम उत्पादन किसानों के लिए अतिरिक्त आय का एक विकल्प बन सकता है। ऐसे में नई किस्मों, उपयुक्त तापमान और उत्पादन तकनीकों पर शोध का महत्व बढ़ जाता है। DMRC सोलन में शिटाके मशरूम की विभिन्न किस्मों पर किया जा रहा अध्ययन हिमाचल प्रदेश में इसकी खेती के नए विकल्प तलाशने का प्रयास है।

निदेशक बी.एल. अत्री के अनुसार, अलग-अलग तापमान में अनुकूल प्रदर्शन करने वाली किस्मों की पहचान से प्रदेश में शिटाके मशरूम की खेती की संभावनाओं को समझने में सहायता मिल सकती है।

फिलहाल, शोध के परिणामों के आधार पर यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जलवायु क्षेत्रों में कौन-सी किस्में बेहतर प्रदर्शन करती हैं और किसानों के लिए उनकी व्यावसायिक खेती कितनी उपयोगी साबित हो सकती है।

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