25 सूत्रीय मांगों को लेकर पदयात्रा पहुंची शिमला, शिक्षक बोले- अधिसूचना रद्द होने तक जारी रहेगा संघर्ष
हिमाचल प्रदेश में राज्य सरकार के न्यू कॉम्प्लेक्स सिस्टम (क्लस्टर सिस्टम) को लेकर प्राथमिक शिक्षक संघ और सरकार के बीच विवाद गहराता जा रहा है। अपनी 25 सूत्रीय मांगों और क्लस्टर सिस्टम की अधिसूचना के विरोध में कांगड़ा के माता बगलामुखी मंदिर से 11 जुलाई को शुरू हुई शिक्षकों की पदयात्रा शनिवार को शिमला पहुंच गई है।
शिक्षकों ने साफ कर दिया है कि जब तक विवादित अधिसूचना को रद्द करने का ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक 26 जुलाई को शिमला के चौड़ा मैदान में प्रस्तावित विशाल धरना-प्रदर्शन तय कार्यक्रम के अनुसार आयोजित किया जाएगा।
वहीं सरकार ने मामले को शांत करने के लिए शिक्षक संघ को मुख्यमंत्री के साथ वार्ता के लिए आमंत्रित किया है।
सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
हिमाचल प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष रमेश शर्मा ने प्रेसवार्ता में कहा कि प्रदेश में प्राथमिक शिक्षा का मजबूत ढांचा वर्ष 1984 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के कार्यकाल में तैयार हुआ था।
उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा क्लस्टर सिस्टम के तहत 15 से 20 प्राथमिक विद्यालयों को एक वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल के प्रिंसिपल के अधीन करना प्राथमिक शिक्षा की मूल व्यवस्था को कमजोर करेगा।
शिक्षक संघ का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य शिक्षकों की कमी दूर करने के बजाय खाली पड़े जेबीटी पदों को भरने से बचना है।
तीन हजार स्कूलों में एक शिक्षक होने का दावा
रमेश शर्मा ने कहा कि प्रदेश के करीब तीन हजार प्राथमिक विद्यालयों में केवल एक शिक्षक कार्यरत है। इसके अलावा प्राथमिक शिक्षकों को चुनाव, जनगणना और अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों में भी लगाया जाता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
उन्होंने दावा किया कि शिक्षकों की कमी के कारण कई प्राथमिक विद्यालय बंद होने की स्थिति में पहुंच गए हैं और अभिभावक सरकारी स्कूलों से बच्चों को निकाल रहे हैं।
शिक्षा क्षेत्र की उपलब्धियों का दिया हवाला
शिक्षक संघ अध्यक्ष ने कहा कि तमाम चुनौतियों के बावजूद हिमाचल की प्राथमिक शिक्षा ने बेहतर प्रदर्शन किया है।
उन्होंने बताया कि ASER रिपोर्ट 2023 में हिमाचल ने देश में बेहतर स्थान हासिल किया और NAS 2024 में भी प्राथमिक वर्ग के विद्यार्थियों ने अच्छा प्रदर्शन किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा क्षेत्र की उपलब्धियों को बढ़ावा देने के बजाय प्राथमिक स्तर की गतिविधियों को सीमित कर रही है।
आंदोलन को बताया गांधीवादी
रमेश शर्मा ने कहा कि शिक्षकों का आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और गांधीवादी तरीके से चलाया जा रहा है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए पदयात्रा ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान निकाली गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में हुए प्रदर्शन के बाद संघ के पदाधिकारियों पर निलंबन, विभागीय जांच और एफआईआर जैसी कार्रवाई की गई।
मांगें पूरी न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी
शिक्षक संघ ने चेतावनी दी है कि यदि क्लस्टर सिस्टम की अधिसूचना वापस नहीं ली गई और अन्य लंबित मांगों पर फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
संघ की प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
न्यू कॉम्प्लेक्स सिस्टम की अधिसूचना रद्द करना
जेबीटी से टीजीटी प्रमोशन पर लगी रोक हटाना
हायर ग्रेड पे बहाल करना
छठे वेतन आयोग और महंगाई भत्ते के बकाए का भुगतान करना
शिक्षक संघ का दावा है कि प्रदेश के हजारों जेबीटी प्रशिक्षित बेरोजगार युवा और नर्सरी ट्रेनिंग प्राप्त अभ्यर्थी भी इस आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं।
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