शिमला I
सरकार ने चुनावी रंजिशों को कम करने और आपसी सहमति को बढ़ावा देने के लिए निर्विरोध चुने जाने वाले प्रतिनिधियों और पंचायतों के लिए विशेष प्रोत्साहन राशि (Grant) की घोषणा की है।
वहीं, राज्य निर्वाचन आयोग आज चुनाव का आधिकारिक शेड्यूल जारी कर सकता है। पंचायती राज विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, यदि किसी निकाय में सभी प्रतिनिधि सर्वसम्मति से चुने जाते हैं, तो सरकार उन्हें इस प्रकार अनुदान देगी ग्राम पंचायत प्रधान, उपप्रधान और सभी वार्ड सदस्य 10 लाख रुपये,
पंचायत समिति चेयरमैन, वाइस चेयरमैन और सभी सदस्य 5 लाख रुपये, जिला परिषद चेयरमैन, वाइस चेयरमैन और सभी सदस्य 15 लाख रुपये I
राज्य निर्वाचन आयुक्त अनिल खाची ने सोमवार को विभाग के उच्च अधिकारियों के साथ करीब तीन घंटे लंबी बैठक की। इस बैठक में चुनाव की तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया। बैलेट पेपर, मतपेटियों और संवेदनशील बूथों की मैपिंग का कार्य पूरा हो चुका है।
जैसे ही चुनाव कार्यक्रम की घोषणा होगी, ग्रामीण और संबंधित शहरी क्षेत्रों में आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू हो जाएगी। 24 अप्रैल को मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन किया जाना तय है।
सरकार ने उम्मीदवारों की योग्यता को लेकर एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। वनाधिकार अधिनियम, 2006 के तहत जिन लोगों के दावे अभी लंबित (Pending) हैं, उन्हें चुनाव लड़ने से नहीं रोका जाएगा।
पंचायती राज विभाग ने उपायुक्तों को निर्देश दिए हैं कि यदि किसी अनुसूचित जनजाति या पारंपरिक वनवासी ने अपने दावे प्रस्तुत किए हैं और उनका निपटारा अभी नहीं हुआ है, तो उन्हें अयोग्य नहीं माना जाएगा।
पंचायती राज विभाग के अनुसार, इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में चुनावी खर्च को कम करना, गुटबाजी को खत्म करना और आपसी सौहार्द को मजबूत करना है। सरकार चाहती है कि चुनाव पर खर्च होने वाली ऊर्जा और पैसा गांव के विकास कार्यों में इस्तेमाल हो।