शिमला।
हिमाचल प्रदेश की पंचायतों में वर्ष 2024-25 के ऑडिट के दौरान गंभीर वित्तीय अनियमितताएं और लापरवाही के बड़े मामले सामने आए हैं। राज्य लेखा परीक्षा विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, शिमला, बिलासपुर और सिरमौर जिलों की पंचायतों में लाखों रुपये के अनुदान का दुरुपयोग, बिना टेंडर के भारी खरीदारी,
अनियमित भुगतान और सरकारी दस्तावेजों में भारी विसंगतियां पाई गई हैं। कई जगहों पर विकास कार्यों के लिए मिले अनुदान का उपयोग ही नहीं किया गया, तो कहीं बिना उचित रिकॉर्ड के ही लाखों रुपये उड़ा दिए गए।
सिरमौर: पंचायत 'रास्त' में लाखों का अनुदान बेकार, टैक्स वसूली भी ठप
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, जिला सिरमौर की पंचायत रास्त में 20.46 लाख रुपये की अनुदान राशि का कोई उपयोग नहीं किया गया। इसके अलावा लाखों रुपये के उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) भी प्रस्तुत नहीं किए गए हैं।
पंचायत के खातों की जांच में रोकड़ बही (कैश बुक) और बैंक खातों के बैलेंस में 1.25 लाख रुपये का अंतर पाया गया। यही नहीं, ग्रामीणों से 43,000 रुपये का गृहकर (हाउस टैक्स) वसूलने में लापरवाही बरती गई और विवाह पंजीकरण से जुटाया गया हजारों रुपये का शुल्क भी सरकारी कोष में जमा नहीं करवाया गया।
शिमला: पंचायत 'चलाहल' में बिना निविदा खरीदी सामग्री
शिमला जिले की पंचायत चलाहल में भी स्थिति चिंताजनक मिली। यहाँ रोकड़ बही में 2.54 लाख रुपये का अंतर और 20.60 लाख रुपये का अनुपयोगी अनुदान पाया गया। नियमों को ताक पर रखकर 1.40 लाख रुपये की सामग्री बिना किसी निविदा (टेंडर) के खरीद ली गई, जबकि 2.23 लाख रुपये की सामग्री का स्टॉक रजिस्टर में कोई रिकॉर्ड ही दर्ज नहीं था।
बिलासपुर: पंचायत 'छडोल' में मनरेगा नियमों की धज्जियां उड़ीं
बिलासपुर की छडोल पंचायत में 17 हजार रुपये का कैश बुक अंतर और 22.75 लाख रुपये का अनुपयोगी अनुदान मिला है। यहाँ मनरेगा के तहत खेत में सिंचाई टैंक निर्माण में श्रम और सामग्री के निर्धारित 60:40 के अनुपात का सीधा उल्लंघन किया गया, जिसके चलते सामग्री पर 1.18 लाख रुपये अधिक खर्च हो गए।
इसके अलावा, 3.04 लाख रुपये की निर्माण सामग्री बिना टेंडर खरीदी गई। रेत, बजरी और पत्थर की आपूर्ति के बिलों के साथ आवश्यक ट्रांजिट पास (माइनिंग पास) संलग्न न होने के बावजूद 6.65 लाख रुपये का अवैध भुगतान कर दिया गया।
बिना बिल-वाउचर के ही बांट दिए हजारों रुपये, ऑडिट विभाग की कड़ी चेतावनी
जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ पंचायतों में विधायक क्षेत्र विकास निधि और मुख्यमंत्री ग्राम पथ योजना के तहत हजारों रुपये का भुगतान बिना किसी बिल या वाउचर के ही कर दिया गया। लाखों रुपये की खरीदी गई सामग्री का कोई रिकॉर्ड स्टॉक रजिस्टर में उपलब्ध नहीं है।
पंचायतों के इस लचर कार्यप्रणाली और खातों के रख-रखाव पर राज्य लेखा परीक्षा विभाग ने गहरा असंतोष व्यक्त किया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि लेखों में तुरंत सुधार की आवश्यकता है। पंचायत सचिव और संबंधित अधिकारियों को सभी विसंगतियों को दूर करने तथा बकाया राशि की वसूली कर जल्द से जल्द 'अनुपालना रिपोर्ट' भेजने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई: पंचायतीराज मंत्री
इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए हिमाचल प्रदेश के पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा है कि पंचायतों में गड़बड़ी पाए जाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने स्वीकार किया कि कई जिलों में विकास कार्यों में गंभीर खामियां पाई गई हैं, हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि जिला शिमला में नाममात्र की ही अनियमितताएं देखने को मिली हैं।