ऊना।
नशे का कारोबार केवल समाज को ही नहीं, बल्कि उसे फैलाने वालों के अपने परिवारों को भी तबाह कर रहा है। ऊना जिले में सामने आई एक दर्दनाक कहानी इस कड़वी सच्चाई को बयां करती है।
जो व्यक्ति वर्षों तक मुनाफे के लिए नशीले पदार्थ बेचकर दूसरों के घरों के चिराग बुझाता रहा, आखिरकार उसी के घर में अंधेरा छा गया। जिले के हरोली क्षेत्र का एक व्यक्ति करीब 30 वर्षों तक अफीम, भुक्की और चूरा-पोस्त जैसे नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़ा रहा।
नशे का यह कारोबार उसके लिए कमाई का जरिया था, लेकिन धीरे-धीरे इसका जहर उसके अपने परिवार में भी फैल गया। पिता को नशा बेचते और सेवन करते देखकर उसके दोनों बेटे भी इस दलदल में उतर गए।
पिता बेचता रहा, बेटे बन गए ग्राहक
समय बीतने के साथ दोनों बेटों को चिट्टे की लत लग गई। पिता बाहर नशा बेचता रहा और उसके बेटे उसी जहर को खरीदकर अपनी जिंदगी बर्बाद करते रहे। हालात इतने बिगड़े कि एक बेटे की नशे की ओवरडोज से मौत हो गई।
उसका शव सुनसान इलाके से बरामद हुआ था। जांच में भी मौत का कारण ओवरडोज ही सामने आया। परिवार की त्रासदी यहीं खत्म नहीं हुई। दूसरा बेटा भी कथित तौर पर चिट्टा तस्करी के मामलों में संलिप्त बताया जाता है। वहीं पिता भी एक समय पुलिस की गिरफ्त में आ चुका है। दावा किया जाता है कि उसने अब नशे का कारोबार छोड़ दिया है, लेकिन उसके परिवार पर पड़े जख्म आज भी ताजा हैं।
जिस जहर से दूसरों के घर उजड़े, उसी ने अपना घर भी निगल लिया
यह मामला केवल एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि नशे के उस भयावह सच की तस्वीर है, जिसमें लालच और अवैध कमाई की कीमत आने वाली पीढ़ियों को चुकानी पड़ती है। जिस व्यक्ति ने वर्षों तक नशे का जहर बेचकर दूसरों के घरों में मातम पहुंचाया, उसी जहर ने उसके अपने घर का एक बेटा छीन लिया और दूसरे का भविष्य अंधकार में धकेल दिया।
ऊना में बढ़ रही चिंता
हरोली क्षेत्र में पिछले कुछ महीनों के दौरान नशे की ओवरडोज से कई युवाओं की मौत हो चुकी है। हीरां थड़ा, बीटन और गोंदपुर बुल्लां जैसे क्षेत्रों में चिट्टे का बढ़ता जाल समाज और प्रशासन दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।
नशे की यह कहानी एक चेतावनी भी है कि अवैध कमाई से भले कुछ समय के लिए मुनाफा मिल जाए, लेकिन उसका अंजाम अक्सर विनाश ही होता है। कई बार दूसरों के घरों में अंधेरा बांटने वाला खुद भी उसी अंधेरे का शिकार हो जाता है।