शिमला।
हिमाचल प्रदेश में हाल ही में संपन्न हुए पंचायती राज चुनावों में आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द की मिसाल पेश करने वाली पंचायतों पर सुक्खू सरकार मेहरबान होने जा रही है।
प्रदेश में पूरी तरह से निर्विरोध चुनी गईं 136 ग्राम पंचायतों को सरकार प्रोत्साहन स्वरूप 25-25 लाख रुपये की बड़ी राशि देने की तैयारी में है। पंचायती राज विभाग ने इसके लिए कुल 34 करोड़ रुपये का एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर अंतिम मंजूरी के लिए वित्त विभाग को भेज दिया है।
वित्त विभाग से हरी झंडी मिलते ही इस फाइल को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के पास अंतिम कैबिनेट स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।
विकास कार्यों और बुनियादी ढांचे पर खर्च होगी राशि
मुख्यमंत्री की अंतिम स्वीकृति मिलते ही संबंधित पंचायतों को बजट जारी कर दिया जाएगा। इस धनराशि का उपयोग पंचायतें अपने-अपने क्षेत्रों में विकास योजनाओं को अमलीजामा पहनाने, बुनियादी ढांचे (आधारभूत ढांचे) को सुदृढ़ करने, पेयजल योजनाओं, स्वच्छता अभियानों, संपर्क सड़कों के निर्माण, सामुदायिक भवनों और अन्य जनहित के कार्यों पर कर सकेंगी।
3,754 में से 136 पंचायतों ने दिखाई समरसता
हिमाचल प्रदेश की कुल 3,754 पंचायतों में प्रधान, उपप्रधान और वार्ड पंचों के पदों के लिए चुनाव प्रक्रिया आयोजित की गई थी। इनमें से केवल 136 पंचायतें ऐसी रहीं जहाँ समाज ने आपसी सहमति से प्रधान, उपप्रधान और सभी वार्ड पंचों को बिना किसी चुनाव के निर्विरोध चुना।
सरकार का मानना है कि ऐसे फैसलों से न केवल भारी चुनावी खर्च और प्रशासनिक भागदौड़ बचती है, बल्कि ग्रामीण स्तर पर आपसी भाईचारा और लोकतांत्रिक सहमति भी मजबूत होती है। इसी को बढ़ावा देने के लिए वर्तमान कांग्रेस सरकार ने इस प्रोत्साहन राशि को पूर्व के 10 लाख रुपये से बढ़ाकर इस बार सीधा 25 लाख रुपये कर दिया है।
किसे कितनी मिलेगी राशि: जिला परिषद के लिए ₹1 करोड़ का प्रविधान
नियमों के तहत प्रदेश में पंचायतों के निर्विरोध चुने जाने पर ₹25 लाख, पंचायत समिति के लिए ₹50 लाख और जिला परिषद के निर्विरोध चुने जाने पर ₹1 करोड़ की राशि का प्रविधान किया गया है। हालांकि, इस बार प्रदेश की कोई भी पंचायत समिति या जिला परिषद निर्विरोध नहीं चुनी जा सकी है।
जिलावार आंकड़े: शिमला रहा सबसे आगे
निर्विरोध चुनी गई 136 पंचायतों में सबसे ज्यादा सामाजिक समरसता शिमला जिले में देखने को मिली है, जबकि चंबा और बिलासपुर इस सूची में सबसे नीचे रहे हैं।
शिमला: 42 पंचायतें
सिरमौर: 27 पंचायतें
किन्नौर: 18 पंचायतें
लाहुल-स्पीति: 17 पंचायतें
सोलन: 13 पंचायतें
मंडी / ऊना / कुल्लू: 05-05 पंचायतें
कांगड़ा: 02 पंचायतें
चंबा / बिलासपुर: 01-01 पंचायतें
आधिकारिक बयान:
पंचायती राज विभाग के अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में वित्त विभाग द्वारा इस प्रस्ताव का बारीक परीक्षण किया जा रहा है। जैसे ही वहाँ से वित्तीय मंजूरी प्राप्त होगी, राशि जारी करने की प्रक्रिया को बेहद तेज गति से पूरा किया जाएगा ताकि संबंधित पंचायतें अपने विकास कार्यों की रूपरेखा समय रहते तैयार कर धरातल पर काम शुरू कर सकें।