छपरा (बिहार)।
बिहार के सारण जिले से एक ऐसा हैरान कर देने वाला और भावुक मामला सामने आया है, जिसने चार साल से अपने बेटे के इंतजार में पथराई आँखों वाले एक परिवार को आखिरकार खुशियों से भर दिया।
मार्च 2022 में स्कूल जाने के लिए घर से निकला एक किशोर अचानक रहस्यमय तरीके से लापता हो गया था। परिवार ने अपने लाडले को ढूंढने के लिए हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन वक्त गुजरने के साथ-साथ उसकी तलाश की हर उम्मीद दम तोड़ती जा रही थी और उसका कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था।
पैन कार्ड बना बेटे तक पहुंचने का जरिया
वर्षों से लंबित इस मामले में एक नया और बेहद चौंकाने वाला मोड़ तब आया, जब हाल ही में लापता किशोर के नाम से डाक के जरिए जारी एक पैन कार्ड अचानक उसके पुराने घर के पते पर पहुंचा। लिफाफे पर अपने गायब हो चुके बेटे का नाम देखकर पूरा परिवार हैरान रह गया। अनहोनी की आशंका और उम्मीद के बीच परिवार ने बिना वक्त गंवाए तुरंत इसकी जानकारी स्थानीय पुलिस को दी।
तकनीकी जांच से खुला बड़ा राज, हिमाचल पहुंची पुलिस
शिकायत मिलते ही पुलिस एक्शन में आ गई और पैन कार्ड के आवेदन से जुड़े दस्तावेजों के साथ-साथ तकनीकी जानकारियों (जैसे मोबाइल नंबर और एड्रेस) की बारीकी से जांच शुरू की।
जांच के दौरान मिले डिजिटल सुराग बिहार पुलिस को सीधे हिमाचल प्रदेश ले गए, जहां वह लापता किशोर रह रहा था। पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए वहां दबिश दी और किशोर को सकुशल बरामद कर लिया। इसके बाद सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद उसे वापस उसके परिवार के सुपुर्द कर दिया गया।
4 साल 3 महीने बाद लौटा लाडला, आँखों से छलके आंसू
करीब चार साल और तीन महीने के लंबे अंतराल के बाद अपने बेटे को सही-सलामत अपने सामने खड़ा देखकर माता-पिता और परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। जिस बेटे के दोबारा मिलने की आस परिवार लगभग खो चुका था, वह अचानक अपनी सूनी गोद में वापस लौट आया था।
यह अनोखा मामला एक बार फिर यह साबित करता है कि उम्मीद और लगातार किए गए प्रयास कभी बेकार नहीं जाते। कभी-कभी एक छोटा सा सरकारी दस्तावेज या सुराग भी वर्षों पुराने गहरे रहस्य से पर्दा उठा सकता है।