शिमला।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने उच्च शिक्षण संस्थानों में महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा व सम्मान के साथ खिलवाड़ करने वाले शिक्षकों के विरुद्ध 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाते हुए सख्त कदम उठाया है। शिक्षा विभाग ने यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ के अलग-अलग मामलों में संलिप्त पाए गए तीन असिस्टेंट प्रोफेसरों को तत्काल प्रभाव से नौकरी से बर्खास्त (Dismiss) कर दिया है।
शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने गुरुवार को इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किए। सरकार द्वारा की गई इस अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत तीनों शिक्षकों की सेवाएं तुरंत समाप्त कर दी गई हैं। यह कदम आंतरिक जांच समितियों की रिपोर्ट और पुलिस कार्रवाई के आधार पर उठाया गया है।
असिस्टेंट प्रोफेसर (केमिस्ट्री) डॉ. अनिल कुमार को बर्खास्त कर दिया गया है। आदेशों के अनुसार, यह बर्खास्तगी उन्हें भविष्य में सरकार के अधीन किसी भी अन्य नौकरी के लिए अयोग्य (Ineligible) घोषित कर देगी।
जवाहर लाल नेहरू राजकीय ललित कला महाविद्यालय, चौड़ा मैदान शिमला में तैनात असिस्टेंट प्रोफेसर पवन को भी यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी पाए जाने पर सेवा से बाहर कर दिया गया है। चंबा जिले के तीसा कॉलेज में कार्यरत गणित के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. वीरेंद्र शर्मा पर भी छेड़छाड़ और उत्पीड़न के गंभीर आरोपों के चलते बर्खास्तगी की गाज गिरी है।
सरकार द्वारा की गई यह कार्रवाई साधारण 'टर्मिनेशन' नहीं बल्कि 'डिसमिसल' (Dismissal) की श्रेणी में आती है। इसका अर्थ यह है कि दोषी शिक्षक न केवल अपनी वर्तमान नौकरी से हाथ धो बैठे हैं, बल्कि वे अब जीवन भर किसी भी सरकारी पद या संस्थान में कार्य करने के पात्र नहीं रहेंगे।
राज्य सरकार के इस कड़े रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षण संस्थानों में किसी भी प्रकार का अनैतिक व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। छात्राओं और महिला कर्मियों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है। शिक्षा विभाग के इस फैसले का छात्र संगठनों और अभिभावकों ने स्वागत किया है।