हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कमजोर विद्यार्थियों की शैक्षणिक क्षमता को मजबूत बनाने के लिए समग्र शिक्षा अभियान (SSA) ने लर्निंग एन्हांसमेंट प्रोग्राम (LEP) 2.0 के दूसरे चरण की शुरुआत की है।
इस योजना के तहत प्रदेश के सरकारी मिडिल, हाई और वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए 12 सप्ताह तक प्रतिदिन 45 मिनट का अनिवार्य 'जीरो पीरियड' संचालित किया जाएगा।
इस विशेष अभियान का उद्देश्य उन विद्यार्थियों की बुनियादी सीखने की कमियों को दूर करना है, जिन्हें नियमित पढ़ाई में अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता की आवश्यकता है।
इन जिलों में लागू हुई नई व्यवस्था
समग्र शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशक राजेश शर्मा द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, शीतकालीन अवकाश वाले स्कूलों—लाहौल-स्पीति, किन्नौर, शिमला, चंबा, मंडी, सोलन और सिरमौर—के साथ-साथ ऊना, सोलन और सिरमौर के एक्सट्रीम समर क्लोजिंग स्कूलों में यह व्यवस्था लागू कर दी गई है।
अन्य ग्रीष्मकालीन अवकाश वाले स्कूलों में 17 अगस्त से जीरो पीरियड शुरू होगा। वहीं, कक्षा 6 के सभी विद्यार्थियों के लिए भी पूरे प्रदेश में यह व्यवस्था 17 अगस्त से लागू होगी, क्योंकि उनकी कार्य पुस्तिकाएं 12 अगस्त तक स्कूलों में उपलब्ध करा दी जाएंगी।
गणित, अंग्रेजी और हिंदी पर रहेगा विशेष फोकस
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जीरो पीरियड किसी भी परिस्थिति में नहीं छोड़ा जाएगा। इस दौरान न तो कोई परीक्षा आयोजित होगी और न ही अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियां होंगी।
साप्ताहिक समय-सारिणी के अनुसार—
विज्ञान विषय से संबंधित कमजोरियों को नियमित कक्षाओं के दौरान ही दूर किया जाएगा।
'संकल्प' कार्य पुस्तिका से होगी पढ़ाई
समग्र शिक्षा अभियान ने विद्यार्थियों के लिए 'संकल्प' कार्य पुस्तिका और शिक्षकों के लिए विशेष हैंडबुक तैयार की है। इन पुस्तिकाओं के माध्यम से विद्यार्थियों की पिछली कक्षाओं की बुनियादी शैक्षणिक कमियों को दूर करने पर जोर दिया जाएगा।
12 अगस्त से प्रत्येक विद्यार्थी की कार्य पुस्तिका के QR कोड को स्कैन कर ऑनलाइन पंजीकरण किया जाएगा। वहीं, 13 अगस्त को सभी शिक्षकों के लिए यूट्यूब लाइव ओरिएंटेशन भी आयोजित किया जाएगा।
स्कूल प्रमुख करेंगे नियमित निगरानी
विभाग ने सभी स्कूल प्रमुखों को एलईपी प्रभारी नियुक्त किया है। वे विद्यार्थियों और शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज करने के साथ-साथ कमजोर विद्यार्थियों की प्रगति की नियमित निगरानी करेंगे और कार्यक्रम के प्रभाव का मूल्यांकन भी करेंगे।
सरकार का उद्देश्य इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों की भाषा एवं गणितीय दक्षता को मजबूत बनाना है, ताकि उनकी नियमित पढ़ाई अधिक प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण हो सके।
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