राज्य सरकार ने जारी की अधिसूचना, महिला बंदियों के लिए अलग बैरक, बच्चों के लिए क्रेच और स्वास्थ्य सुविधाओं की होगी व्यवस्था
हिमाचल प्रदेश की पहली समर्पित महिला जेल मंडी में स्थापित की जाएगी। राज्य सरकार ने इसे लेकर अधिसूचना जारी कर दी है। जेल को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और केंद्रीय गृह मंत्रालय के मॉडल प्रिजन मैनुअल के अनुरूप विकसित किया जाएगा।
शुरुआत में यहां 50 से 100 महिला बंदियों को रखने की व्यवस्था होगी, जिसे जरूरत के अनुसार चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जाएगा। वर्तमान में प्रदेश की 139 महिला बंदियों को विभिन्न जिला कारागारों में बने महिला बैरकों में रखा जाता है।
अलग महिला जेल बनने से बंदियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और अन्य जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों को रखने की समस्या भी कम होगी। मंडी जिला कारागार में महिला जेल संचालित होगी, जबकि वहां के पुरुष बंदियों को नेरचौक में बन रहे नए जेल परिसर में शिफ्ट किया जाएगा।
महिला जेल में विचाराधीन और सजायाफ्ता बंदियों के लिए अलग-अलग बैरक होंगे। पहली बार जेल पहुंचने वाली बंदियों को आदतन या गंभीर अपराधों की आरोपियों से अलग रखा जाएगा।
छह साल तक के बच्चों के साथ रहने वाली बंदियों के लिए विशेष बैरक और बच्चों के लिए मुख्य बैरक से अलग क्रेच बनाया जाएगा। यहां खेलकूद, प्रारंभिक शिक्षा, आंगनबाड़ी जैसी सुविधाएं, पौष्टिक भोजन तैयार करने के लिए अलग पेंट्री और बच्चों व परिजनों की मुलाकात के लिए केंद्र होगा।
बंदियों के स्वास्थ्य और मानसिक कल्याण के लिए मिनी अस्पताल या डिस्पेंसरी बनाई जाएगी, जहां स्त्री रोग जांच और प्रसव पूर्व व प्रसव के बाद देखभाल की प्राथमिक सुविधाएं मिलेंगी। तनाव प्रबंधन के लिए काउंसलिंग, योग और ध्यान की व्यवस्था भी होगी।
महिला बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सिलाई-कढ़ाई, बेकरी, फूड प्रोसेसिंग, हैंडलूम, हस्तशिल्प, कंप्यूटर और पैकेजिंग का प्रशिक्षण दिया जाएगा। जेल के आंतरिक प्रशासन, सुरक्षा और संचालन की जिम्मेदारी महिला जेलर, डिप्टी जेलर और वार्डन संभालेंगी, जबकि बाहरी सुरक्षा में होमगार्ड और पुरुष कर्मी तैनात हो सकेंगे।
सुरक्षा के लिए स्मार्ट बाड़, सीसीटीवी, बायोमेट्रिक प्रवेश-निकास और निगरानी चौकियां प्रस्तावित हैं। महानिदेशक कारागार एवं सुधारात्मक सेवाएं अभिषेक त्रिवेदी के अनुसार, प्रदेश की पहली समर्पित महिला जेल महिला बंदियों के पुनर्वास और गरिमा को सुनिश्चित करेगी।
इसका उद्देश्य जेलों को केवल सजा का स्थान न रखकर सकारात्मक बदलाव और सीखने के माध्यम से बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।