शिमला
हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग में अस्थायी या नीतिगत आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति का एक नया और अनूठा मामला सामने आया है। राज्य के इतिहास में यह पहली बार हो रहा है जब शिक्षा विभाग बिना किसी पदनाम (Designation) के शिक्षकों की भर्ती कर रहा है।
ये शिक्षक स्कूलों में नियमित सिलेबस नहीं पढ़ाएंगे, बल्कि विद्यार्थियों में गणित और अंग्रेजी विषय की कमियों को दूर करने की विशेष जिम्मेदारी संभालेंगे।
305 अंग्रेजी शिक्षकों की भर्ती फाइल तैयार, जल्द जारी होंगे आदेश
गणित शिक्षकों की नियुक्ति: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से संबद्ध प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 308 गणित शिक्षकों की नियुक्ति पहले ही की जा चुकी है।
अंग्रेजी शिक्षकों की भर्ती: स्कूल शिक्षा निदेशालय ने 305 अंग्रेजी शिक्षकों की नियुक्ति की फाइल सरकार को मंजूरी के लिए भेज दी है। सोमवार या मंगलवार तक इनके नियुक्ति आदेश जारी होने की पूरी संभावना है।
कक्षा का जिम्मा: इन शिक्षकों को प्री-प्राइमरी से लेकर 12वीं कक्षा तक के बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा सौंपा जाएगा।
नियमित सिलेबस से अलग होगा काम और विशेष पाठ्यक्रम
विभाग इन शिक्षकों के लिए एक विशेष अतिरिक्त पाठ्यक्रम तैयार कर रहा है, जो मौजूदा सिलेबस से अलग होगा। इसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों की दक्षता और सीखने के स्तर में सुधार करना है।
कमियां दूर करना जिम्मेदारी: ये शिक्षक हर कक्षा में जाकर बच्चों की गणित और अंग्रेजी विषय की कमजोरियों को पहचान कर उन्हें दूर करेंगे।
प्रधानाचार्य तय करेंगे पीरियड: स्कूल के प्रधानाचार्य (Principal) अपनी सुविधा के अनुसार इनका समय और पीरियड तय करेंगे। नियमित सिलेबस पढ़ाने के लिए अलग से नियुक्तियां की जाएंगी।
वेतनमान और नियम एवं शर्तें
यह नियुक्तियां 'स्कीम फार सीबीएसई एफिलिएटेड स्कूल्स आफ एक्सीलेंस इन हिमाचल प्रदेश' के तहत बनाई गई एक विशेष उप योजना के अंतर्गत की जा रही हैं:
अनुबंध की अवधि: इन शिक्षकों को विभाग में 5 साल के लिए नियुक्त किया जाएगा।
निश्चित मानदेय: नियुक्त होने वाले शिक्षकों को 30,000 रुपये मासिक निश्चित मानदेय मिलेगा।
10 महीने का वेतन: शिक्षकों को साल में केवल 10 महीने का ही वेतन दिया जाएगा, जबकि दो महीने के अवकाश (Vacation) के दौरान कोई मानदेय नहीं मिलेगा।
राजकीय अध्यापक संघ ने नीति पर उठाए सवाल, बताया भविष्य की चुनौती
शिक्षकों की नियुक्ति के लिए यह नीति बिल्कुल भी उचित नहीं है। पूर्व में हुई पीटीए, पैट, पैरा और एसएमसी भर्तियों में शिक्षकों की श्रेणी (जैसे जेबीटी, टीजीटी, प्रवक्ता आदि) तय होती थी।
लेकिन ये शिक्षक न टीजीटी हैं और न पीजीटी। बिना पदनाम के नियुक्ति का यह प्रचलन भविष्य में विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर के साथ शनिवार को हुई बैठक में भी इस मामले को प्रमुखता से उठाया गया है।