पॉक्सो एक्ट के दोषी को 25 साल और चरस तस्करी के आरोपी को 18 महीने की कठोर जेल
पॉक्सो एक्ट के दोषी को 25 साल और चरस तस्करी के आरोपी को 18 महीने की कठोर जेल
By Varsha Mahant
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शिमला
जिला शिमला पुलिस की प्रभावी जांच और अदालत में की गई सुदृढ़ पैरवी के परिणामस्वरूप न्याय विभाग को बड़ी सफलता मिली है। माननीय न्यायालयों ने दो अलग-अलग मामलों में आरोपियों को दोषी करार देते हुए जेल और भारी जुर्माने की सजा सुनाई है।
पहला मामला: मासूम से दरिंदगी करने वाले को 25 वर्ष का कठोर कारावास
यह मामला महिला पुलिस थाना/बाल संरक्षण इकाई (FMPS/BCS) शिमला में वर्ष 2024 में दर्ज हुआ था।
दोषी की पहचान: शंकर लाल पुत्र स्वर्गीय श्री चरण दास, निवासी ग्राम कुईयारू, डाकघर देवनगर, तहसील एवं जिला शिमला।
सजा का विवरण: माननीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश, फास्ट ट्रैक कोर्ट (रेप/POCSO) शिमला ने पुलिस द्वारा पेश किए गए पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराया। न्यायालय ने दोषी को धारा 6 पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) के तहत 25 वर्ष के कठोर कारावास और ₹20,000 जुर्माने की सजा सुनाई है।
अतिरिक्त शर्त: जुर्माना न भरने की सूरत में दोषी को तीन महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
दूसरा मामला: एनडीपीएस एक्ट (नशा तस्करी) में 18 महीने की जेल
यह मामला पुलिस थाना ठियोग में वर्ष 2019 में दर्ज किया गया था, जिसमें पुलिस ने आरोपी को नशीले पदार्थों के साथ दबोचा था।
दोषी की पहचान:सुरेश कुमार पुत्र श्री नारायण दास, निवासी ग्राम पटागण, डाकघर पनोगी, तहसील कोटखाई, जिला शिमला।
सजा का विवरण: पुलिस द्वारा जुटाए गए वैज्ञानिक और चश्मदीद साक्ष्यों के आधार पर माननीय विशेष न्यायाधीश, सीबीआई न्यायालय ने दोषी को धारा 18 और 29 एनडीपीएस (NDPS) अधिनियम के तहत 18 माह के कठोर कारावास तथा ₹15,000 जुर्माने की सजा सुनाई।
अतिरिक्त शर्त: जुर्माना अदा न करने की स्थिति में दोषी को दो महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास काटना होगा।
अपराधियों को सजा दिलाने के लिए शिमला पुलिस प्रतिबद्ध
जिला शिमला पुलिस प्रशासन ने इस कामयाबी पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि पुलिस गंभीर अपराधों, विशेषकर महिलाओं व बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों और नशा तस्करी के मामलों में 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर काम कर रही है। सटीक अन्वेषण (Investigation) और सफल अभियोजन (Prosecution) सुनिश्चित करके अपराधियों को उनके अंजाम तक पहुंचाना ही पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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