शिमला
हिमाचल प्रदेश का आर्थिक व्यवहार और भुगतान संस्कृति एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। कभी जेब में छुट्टे पैसे और छोटे नोट रखना अनिवार्य माना जाता था, लेकिन अब स्मार्टफोन ही नया बटुआ बनता जा रहा है।
डिजिटल भुगतान (UPI) व्यवस्था के तेजी से बढ़ते दायरे ने न केवल नकदी पर निर्भरता कम की है, बल्कि प्रदेश में एटीएम (ATM) से नकदी निकालने के औसत को भी काफी नीचे ला दिया है।
एटीएम ट्रांजेक्शन में आई कमी: एसबीआई की रिपोर्ट
एसबीआई रिसर्च की ताजा 'इकोरैप' रिपोर्ट और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के आंकड़े इसकी तस्दीक करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में प्रति एटीएम मासिक औसत नकदी वितरण वित्त वर्ष 2023 में 1.21 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2024 में घटकर 1.12 करोड़ रुपये रह गया।
वहीं, वित्त वर्ष 2026 के शुरुआती महीनों में यह आंकड़ा और गिरकर करीब 1.03 करोड़ रुपये पर आ गया है। बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलती आर्थिक संस्कृति का स्पष्ट संकेत है।
करेंसी नोटों के चलन में बदलाव
हिमाचल में नोटों के उपयोग को लेकर भी दिलचस्प रुझान सामने आए हैं मार्च 2025 के मुकाबले मार्च 2026 में 100 रुपये के नोट की मांग में 0.3 फीसदी का इजाफा हुआ है। इसके मूल्य में 0.7 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है, हालांकि प्रदेश की जनता अभी भी बड़े भुगतान के लिए 500 के नोट पर निर्भर है। 200 रुपये के नोट इसकी हिस्सेदारी में 0.4 फीसदी की कमी आई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी यूपीआई की धूम
पहले डिजिटल भुगतान को केवल शहरों तक सीमित माना जाता था, लेकिन अब हिमाचल के दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों में भी यूपीआई तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। पंचायत स्तर पर दुकानदार क्यूआर कोड (QR Code) के माध्यम से भुगतान ले रहे हैं।
इससे छोटे कारोबारियों को नकदी संभालने और बैंकों में जमा करने की झंझट से मुक्ति मिली है। साथ ही, पर्यटन स्थलों पर आने वाले पर्यटक अब होटल, टैक्सी और रेस्तरां में नकदी के बजाय मोबाइल भुगतान को ही प्राथमिकता दे रहे हैं।
छुट्टे पैसों की किचकिच से मिली राहत
डिजिटल व्यवस्था ने दुकानदारों और ग्राहकों के बीच होने वाली रोजमर्रा की बहस को खत्म कर दिया है। कुछ साल पहले 500 का नोट देकर 10 या 20 रुपये की खरीदारी करना चुनौतीपूर्ण होता था, लेकिन अब ₹1 का भुगतान भी सीधे खाते में हो रहा है। इससे न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि छुट्टे पैसों की समस्या भी पूरी तरह समाप्त हो गई है।
हिमाचल में भुगतान की यह नई संस्कृति आने वाले वर्षों में और मजबूत होगी। सरकारी योजनाओं और स्मार्टफोन की पहुँच ने इसे आम आदमी की जिंदगी का हिस्सा बना दिया है। हालांकि, डिजिटल बढ़त के साथ साइबर धोखाधड़ी से सावधान रहने की भी जरूरत है।" — दीपक कुमार, प्रभारी, राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति
सावधानी भी है जरूरी
जहाँ एक ओर डिजिटल भुगतान ने जीवन सुगम बनाया है, वहीं साइबर ठगी की घटनाएं भी बढ़ी हैं। बैंक और प्रशासन लगातार लोगों को फर्जी लिंक, स्क्रीन शेयरिंग एप और ओटीपी (OTP) साझा न करने के प्रति जागरूक कर रहे हैं ताकि उनकी मेहनत की कमाई सुरक्षित रह सके।