शिमला
हिमाचल प्रदेश में डिजिटल क्रांति के साथ-साथ साइबर अपराध का खतरा भी तेजी से पांव पसार रहा है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ताजा रिपोर्ट ने प्रदेश में ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर चिंताजनक आंकड़े पेश किए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023 की तुलना में 2024 में साइबर अपराध के मामलों में लगभग 16.5 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पिछले महज दो वर्षों में साइबर अपराध के मामलों में करीब दोगुनी बढ़ोतरी हुई है, जो राज्य में डिजिटल सुरक्षा की चुनौतियों को उजागर करता है।
आंकड़ों की जुबानी बढ़ता खतरा
एनसीआरबी के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2022 में प्रदेश में साइबर अपराध के कुल 77 मामले दर्ज किए गए थे। यह संख्या 2023 में बढ़कर 127 और 2024 में 148 तक पहुंच गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में प्रति लाख आबादी पर साइबर अपराध की दर 2.0 दर्ज की गई है। अपराधी अब पारंपरिक चोरी और ठगी के बजाय डिजिटल माध्यमों को अपना हथियार बना रहे हैं, जिससे आम जनता की मेहनत की कमाई पर सेंध लगाई जा रही है।
ठगी के तरीके और मुख्य उद्देश्य
रिपोर्ट में यह साफ हुआ है कि अधिकांश साइबर अपराधों का मुख्य उद्देश्य आर्थिक लाभ हासिल करना रहा है। ठगों ने ओटीपी फ्रॉड, बैंक खातों की हैकिंग, फर्जी निवेश योजनाओं और ऑनलाइन लुभावने ऑफर्स के जरिए लोगों को निशाना बनाया।
वित्तीय धोखाधड़ी के अलावा सोशल मीडिया पर मानहानि और महिलाओं के खिलाफ अश्लील सामग्री प्रसारित करने के मामलों में भी इजाफा हुआ है। वर्तमान में आईटी एक्ट की धारा 66 के तहत सबसे अधिक शिकायतें दर्ज की जा रही हैं।
जांच में हिमाचल पुलिस का बेहतर प्रदर्शन
अपराधों की बढ़ती संख्या के बीच राहत की बात यह है कि हिमाचल प्रदेश पुलिस की कार्रवाई और जांच का स्तर अन्य राज्यों की तुलना में काफी प्रभावी रहा है। पुलिस ने 62.5 फीसदी मामलों में चार्जशीट दाखिल की है, जो कई बड़े राज्यों की कार्यप्रणाली से बेहतर है।
इसके अलावा, हिल स्टेट्स (पहाड़ी राज्यों) की श्रेणी में हिमाचल प्रदेश का सीसीटीएनएस (CCTNS) प्रदर्शन शीर्ष पर रहा है। पुलिस प्रशासन अब लोगों को जागरूक करने और साइबर सेल को और अधिक आधुनिक बनाने पर जोर दे रहा है।