शिमला।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने अपनी प्रमुख चुनावी गारंटी 'इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना' के नियमों में बड़ा संशोधन किया है। योजना को अब अधिक लक्षित (Targeted) बनाने के लिए सरकार ने वार्षिक आय की शर्त लागू कर दी है। 15 अप्रैल को हिमाचल दिवस के अवसर पर किन्नौर से इस योजना के विधिवत शुभारंभ के दौरान इन नए नियमों की घोषणा की गई।
योजना के शुरुआती मसौदे में वार्षिक आय को लेकर कोई स्पष्ट शर्त नहीं थी, लेकिन अब सरकार ने इसके दायरे को सीमित कर दिया है जिन महिलाओं के परिवार की वार्षिक आय 2 लाख रुपये से अधिक है, उन्हें अब हर महीने मिलने वाले 1500 रुपये नहीं दिए जाएंगे।
सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि पूर्व में किए गए सभी आवेदन अब अमान्य माने जाएंगे। पात्र महिलाओं को अब नए नियमों के आधार पर नए सिरे से आवेदन करना होगा।
सरकार के इस कदम के पीछे मुख्य रूप से तीन कारण माने जा रहे हैं प्रदेश पर बढ़ते आर्थिक दबाव और वित्तीय संसाधनों के प्रबंधन के लिए पात्रता मानदंडों को सख्त किया गया है।
उम्मीद से कहीं अधिक आवेदन प्राप्त होने के कारण सरकार ने वास्तविक जरूरतमंदों तक लाभ पहुँचाने का निर्णय लिया है। सरकार चाहती है कि इस योजना का लाभ केवल उन्हीं महिलाओं को मिले जिन्हें वास्तव में आर्थिक संबल की आवश्यकता है।
18 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को प्रतिमाह 1500 रुपये की सहायता देने का वादा सरकार ने चुनाव के दौरान किया था। हालांकि, इन नए संशोधनों से लाभार्थियों की संख्या में खासी कमी आने की संभावना है। विपक्ष और सामाजिक हल्कों में इसे सरकार के बजट प्रबंधन की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
संशोधित नियमों के अनुसार नए फॉर्म जल्द ही पंचायतों और संबंधित विभागों के माध्यम से उपलब्ध होंगे। आवेदन के साथ आय प्रमाण पत्र संलग्न करना अनिवार्य हो सकता है। अन्य अपवर्जन श्रेणियां (जैसे सरकारी कर्मचारी, पेंशनभोगी आदि के परिवार) पहले की तरह ही योजना से बाहर रहेंगे।