भारतीय सेना के लिए आधुनिक ड्रोन तकनीक पर काम करने वाले हमीरपुर पॉलिटेक्निक के छात्र सर्वेश कुमार शर्मा को हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने सर्किट हाउस हमीरपुर में सम्मानित किया। सर्वेश ने डिफेंस इनोवेशन के तहत ऐसा ड्रोन प्रोजेक्ट तैयार किया है, जिसमें बिना GPS ड्रोन नेविगेशन की समस्या के समाधान पर काम किया गया है।
सर्वेश के अनुसार, उनके आधुनिक ड्रोन प्रोजेक्ट को भारत सरकार की ओर से स्वीकृति दी गई है और इसके लिए करीब 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट भी जारी की गई है। आगामी दिनों में वह IIT रुड़की के सहयोग से ड्रोन तकनीक को विकसित करने के लिए काम करेंगे।
राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने सर्वेश की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि समाचार पत्र के माध्यम से उन्हें जानकारी मिली थी कि भानवी गांव का यह छात्र पॉलिटेक्निक में पढ़ाई के साथ ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में काम कर रहा है।
उन्होंने कहा कि सर्वेश की कुशलता और प्रोजेक्ट को देखते हुए डिफेंस विभाग ने इसे मंजूरी दी है और इसके लिए करीब 3.5 करोड़ रुपये की राशि मिलने की बात सामने आई है।
राज्यपाल ने कहा कि सर्वेश निर्धारित नियमों और मानकों के अनुसार इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि यह हिमाचल के लिए गर्व और खुशी का विषय है कि प्रदेश का एक युवा छात्र नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ और स्टार्टअप के विचार का उल्लेख करते हुए उन्होंने युवाओं से देश की प्रगति में योगदान देने का आह्वान किया।
वहीं, सर्वेश कुमार शर्मा ने बताया कि उन्होंने जोधपुर में आयोजित ‘फ्लाइंग विंग्स हैकाथॉन’ में हिस्सा लिया था। प्रतियोगिता में तीन अलग-अलग समस्याएं दी गई थीं, जिनमें से उन्होंने बिना GPS ड्रोन की नेविगेशन से जुड़ी समस्या पर काम किया। इसके लिए उन्होंने एक आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल का विचार विकसित किया।
सर्वेश ने बताया कि इसके बाद इस काम को केवल प्रतियोगिता तक सीमित रखने के बजाय डिफेंस स्टार्टअप के माध्यम से इस तकनीक को और विकसित करने का निर्णय लिया। उनका उद्देश्य भारतीय सेना की सीमाओं पर आने वाली विभिन्न तकनीकी समस्याओं के समाधान तैयार करना और ड्रोन को हाईटेक बनाना है।
गौरतलब है कि साधारण परिवार से निकलकर सर्वेश ने यह उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भानवी से प्राप्त की। पढ़ाई के साथ ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में उनकी रुचि और काम ने उन्हें डिफेंस इनोवेशन की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दिया है।
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