प्रिंसिपल चंद्रशेखर बोले- 28 अक्टूबर को डिफेंस की ईमेल से मिली धोखाधड़ी की जानकारी, ₹3.5 करोड़ की ग्रांट मंजूर होने का दावा निकला फर्जी
हमीरपुर में सेना के लिए ड्रोन बनाने वाले छात्र सर्वेश कुमार के साथ कथित साइबर फ्रॉड का मामला सामने आने के बाद पॉलिटेक्निक संस्थान के प्रिंसिपल चंद्रशेखर ने मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने इस मामले में डिफेंस की ओर से भेजी गई ईमेल भी साझा की। प्रिंसिपल की शिकायत पर पुलिस ने साइबर एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
प्रिंसिपल चंद्रशेखर ने बताया कि 28 अक्टूबर को डिफेंस की ओर से ईमेल के माध्यम से जानकारी मिली कि छात्र सर्वेश कुमार के साथ साइबर धोखाधड़ी हो रही है। इसके बाद सर्वेश से भी बात की गई, लेकिन वह कोई ठोस जवाब नहीं दे पाया। इसी के चलते पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई गई। उन्होंने कहा कि पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है।
सर्वेश के तीसरी मंजिल से गिरने की भी जांच जारी
छात्र के तीसरी मंजिल से गिरने के मामले पर प्रिंसिपल ने कहा कि इसकी जांच चल रही है और जांच पूरी होने के बाद ही पता चल पाएगा कि वह ऊपर से कैसे गिरा। उन्होंने बताया कि घटना वाले दिन सुबह सर्वेश ने उनसे मुलाकात कर बातचीत की थी, लेकिन दोपहर के समय सूचना मिली कि वह अपने हॉस्टल के कमरे में गिर गया है। फिलहाल छात्र का चंडीगढ़ स्थित पीजीआई में उपचार चल रहा है।
प्रिंसिपल चंद्रशेखर के अनुसार, छात्र के साथ गंभीर ऑनलाइन ठगी होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि इस मामले में पहले से ही कुछ गड़बड़ी की आशंका लग रही थी, क्योंकि सर्वेश ने शुरू से कई तथ्यों को साझा नहीं किया था।
उनके मुताबिक, सर्वेश ने केवल 27 अक्टूबर को डिफेंस के साथ ईमेल के जरिए जानकारी लेने की बात बताई थी। इस मामले का खुलासा 28 अक्टूबर को ईमेल वापस आने के बाद हुआ।
₹3.5 करोड़ की ग्रांट मंजूर होने का दावा निकला फर्जी
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, साइबर ठगों ने डिजिटल पत्राचार के माध्यम से छात्र को विश्वास दिलाया कि उसके ‘रुद्रा एज टी-1 (स्पेक्ट्रा)’ प्रोजेक्ट के लिए भारत सरकार के रक्षा नवाचार संगठन की iDEX पहल के तहत 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट मंजूर की गई है। छात्र इस दावे को सच मान बैठा।
मामले का खुलासा अक्टूबर 2026 में रक्षा नवाचार संगठन से मिली आधिकारिक सूचना के बाद हुआ। इसमें स्पष्ट किया गया कि संगठन के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार छात्र या उससे जुड़े किसी भी स्टार्टअप को कोई ग्रांट मंजूर या जारी नहीं की गई थी। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
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