धर्मशाला में हिमालय संरक्षण कार्यक्रम में बोले राज्यपाल- संरक्षण को बनाना होगा जन आंदोलन, इंद्रेश कुमार ने कहा- विकास और पर्यावरण में संतुलन जरूरी
धर्मशाला में हिमालय परिवार की ओर से आयोजित कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने हिमालय संरक्षण को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग लगातार चेतावनी दे रहे हैं।
यदि हिमालय के साथ छेड़छाड़ जारी रही तो यहां के जल स्रोत प्रलय का रूप ले सकते हैं। ऐसे में हिमालय की जैव विविधता, पर्यावरण और जल स्रोतों का संरक्षण बेहद जरूरी है।
राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने कहा कि हिमालय परिवार की ओर से हिमालय संरक्षण को लेकर लिया गया संकल्प आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हिमालय संरक्षण के इस अभियान को केवल किसी संगठन या कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा जा सकता।
इसे घर-घर तक पहुंचाकर जन आंदोलन का रूप देना होगा, तभी हिमालय और उससे जुड़े प्राकृतिक संसाधनों का प्रभावी संरक्षण संभव हो सकेगा।
पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ते ट्रैफिक दबाव और पर्यावरण संरक्षण को लेकर पूछे गए सवाल पर राज्यपाल ने कहा कि सरकार विभाग या संगठन बना सकती है, लेकिन आम लोगों की भागीदारी के बिना पर्यावरण संरक्षण संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि हिमालय और पर्यावरण को बचाने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।
कार्यक्रम में आरएसएस के वरिष्ठ सदस्य इंद्रेश कुमार ने भी हिमालय संरक्षण को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य हिमालय के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करना है। उन्होंने हिमालय को दुनिया के बड़े जल स्रोत, वनस्पति और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में बताया।
इंद्रेश कुमार ने कहा कि यदि हिमालय सुरक्षित रहेगा तो पर्यावरण संरक्षण के साथ संस्कृति और संतुलित विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि असंतुलित विकास के कारण प्रदूषण और प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ रहा है। ऐसे में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि हिमालय केवल पहाड़ों की श्रृंखला नहीं है, बल्कि पर्यावरणीय और सामाजिक जीवन के लिए इसका विशेष महत्व है। इसलिए इसके संरक्षण के लिए लोगों में जागरूकता बढ़ाना और सामूहिक भागीदारी सुनिश्चित करना जरूरी है।
वहीं, BRICS सम्मेलन को लेकर राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने कहा कि भारत ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की भावना में विश्वास करता है। उन्होंने कहा कि भारत चाहता है कि दुनिया के देश आपसी सहयोग और सद्भाव के साथ आगे बढ़ें।
इंद्रेश कुमार ने कहा कि आज दुनिया को नफरत और युद्ध नहीं, बल्कि शांति और सह-अस्तित्व की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत का संदेश ‘युद्ध नहीं, बुद्ध चाहिए’ का है। उन्होंने उम्मीद जताई कि BRICS विश्व को हिंसा, तनाव, अपराध और युद्ध से मुक्त करने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर शांति और समृद्धि के साथ भ्रष्टाचार और अपराध को कम करने के लिए भी प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने विकास के साथ मानवीय मूल्यों, पर्यावरण संरक्षण और सह-अस्तित्व को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
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