शिमला
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली को प्रभावी बनाने में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) के 'हिमालयन सेंटर' के योगदान की जमकर सराहना की है।
एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इस सेंटर द्वारा किए जा रहे वैज्ञानिक अनुसंधानों का विस्तार प्रदेश के अन्य संवेदनशील क्षेत्रों तक भी किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह सेंटर न केवल आपदा पूर्व तैयारी, बल्कि आपदा के बाद होने वाले 'आवश्यकता मूल्यांकन अध्ययनों' (Post-Disaster Needs Assessment) में भी राज्य सरकार का मुख्य सहयोगी होगा।
तकनीकी क्षमता और विशेषज्ञों की होगी तैनाती
मुख्यमंत्री ने सेंटर को और अधिक सशक्त बनाने के लिए अतिरिक्त पेशेवरों और विषय विशेषज्ञों की भर्ती के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। उन्होंने सेंटर की वैज्ञानिक और अनुसंधान क्षमता को सुदृढ़ करने के लिए वित्तीय सहायता के साथ-साथ तकनीकी बुनियादी ढांचे के विस्तार पर भी बल दिया।
सीएम ने कहा कि सेंटर के योगदान से राज्य में आपदा तैयारी और लचीलापन योजना (Resilience Planning) को नई मजबूती मिलेगी, जिससे भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को कम किया जा सकेगा।
बाहरी एजेंसियों पर निर्भरता कम करने की रणनीति
जस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने बैठक में महत्वपूर्ण बिंदु उठाते हुए कहा कि भूस्खलन और ग्लेशियर फटने जैसी घटनाओं के अध्ययन के लिए अब बाहरी एजेंसियों पर निर्भरता कम की जाएगी।
उन्होंने सेंटर की सराहना करते हुए कहा कि राज्य के भीतर ही तकनीकी विशेषज्ञता विकसित करना और डीपीआर (DPR) तैयार करने जैसी क्षमताओं को सुदृढ़ करना समय की मांग है। नेगी ने जोर देकर कहा कि राज्य में आपदा जोखिम न्यूनीकरण के क्षेत्र में वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता आने से राहत कार्यों में तेज़ी और सटीकता आएगी।
थुनाग के लिए हाइड्रोडायनामिक मॉडल की प्रस्तुति
बैठक के दौरान मंडी जिला के थुनाग क्षेत्र के लिए सेंटर द्वारा विकसित 'हाइड्रोडायनामिक मॉडल' पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी गई। इस मॉडल के जरिए फ्लैश फ्लड (अचानक आई बाढ़) के प्रभावों का वैज्ञानिक आकलन और प्रारंभिक चेतावनी तंत्र विकसित करने की क्षमता का प्रदर्शन किया गया।
बैठक में एचपीटीडीसी के अध्यक्ष रघुबीर सिंह बाली, कुलपति प्रो. महावीर सिंह और सेंटर के निदेशक प्रो. एनएस नेगी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने जलवायु जोखिम अध्ययन और तकनीकी सहयोग को और अधिक विस्तार देने पर सहमति जताई।