शिमला।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रदेश की आर्थिकी और लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर सरकार का दृष्टिकोण स्पष्ट किया है। शिमला में मीडिया से रूबरू होते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार 'आत्मनिर्भर हिमाचल' के लक्ष्य के साथ काम कर रही है और विधानसभा में विपक्ष की सार्थक बातों को भी गंभीरता से सुना जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने डीजल पर सेस बढ़ाए जाने की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में डीजल पर सेस बढ़ाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। भविष्य में यदि आवश्यकता पड़ी, तभी इस पर विचार होगा। राजस्व घाटा अनुदान (RDG) न मिलने से बजट पर दबाव बढ़ा है, फिर भी सरकार अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
मुख्यमंत्री ने हाल ही में लाए गए सख्त दल-बदल कानून की पैरवी करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा अनिवार्य है। जो जनप्रतिनिधि पांच साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले दल बदलते हैं, वे लोकतंत्र को कमजोर करते हैं। नए एक्ट के तहत ऐसे सदस्यों को किसी भी प्रकार की सरकारी सुविधा का लाभ नहीं दिया जाएगा।
हिमाचल के स्वास्थ्य ढांचे में सुधार का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने बताया कि इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) में 19 साल पुरानी एमआरआई मशीनों के स्थान पर अब पहली बार PET स्कैन मशीन स्थापित की जा रही है। इससे मरीजों को कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के सटीक परीक्षण के लिए अब चंडीगढ़ या अन्य राज्यों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
मुख्यमंत्री ने सरकार की आगामी प्राथमिकताओं पर भी प्रकाश डाला प्रदेश में 31 मई से पहले पंचायती राज चुनाव संपन्न कराने का लक्ष्य रखा गया है। 'हिम केयर' योजना में सामने आई अनियमितताओं और एक पुरुष के ऑपरेशन से जुड़े संदिग्ध मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति दोहराई। वाहनों के लिए एंट्री टैक्स कम रखा गया है और सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों की सुविधा के लिए विशेष 'पास व्यवस्था' शुरू की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आपसी विवादों से दूर रहकर जनहित के कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने के सख्त निर्देश दिए हैं।मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि इन सुधारों और कड़े निर्णयों के साथ हिमाचल प्रदेश जल्द ही एक आत्मनिर्भर और समृद्ध राज्य के रूप में उभरेगा।