चंबा I
हिमाचल प्रदेश के चुराह क्षेत्र में लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे एक फर्जी डॉक्टर के मामले में नया मोड़ आया है। रेटा गांव में बिना लाइसेंस क्लीनिक चलाने वाले फर्जी डॉक्टर के पास से ली गई दवाओं के सैंपल जांच में फेल पाए गए हैं। इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग ने दिल्ली की एक दवा कंपनी सहित अन्य संबंधित पक्षों पर कार्रवाई तेज कर दी है।
जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 12 जनवरी को रेटा गांव में रेड के दौरान बच्चों को दी जाने वाली एंटीबायोटिक दवा 'एजिथ्रोमाइसिन' (Azithromycin) का सैंपल भरा था। कंडाघाट स्थित प्रयोगशाला में जांच के बाद यह दवा मानकों पर खरी नहीं उतरी।
पकड़े गए फर्जी डॉक्टर ने बताया कि उसने यह दवा चंबा के एक थोक विक्रेता से खरीदी थी। विभाग की पूछताछ में चंबा के थोक विक्रेता ने दिल्ली की एक फार्मेसी कंपनी का नाम उजागर किया, जिससे यह स्टॉक मंगवाया गया था।
स्वास्थ्य विभाग ने दिल्ली की संबंधित कंपनी को नोटिस जारी कर इस विशेष बैच की दवा की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, उन सभी केमिस्टों की सूची मांगी गई है जिन्हें यह दवा बेची गई थी।
उल्लेखनीय है कि ड्रग इंस्पेक्टर लवली ठाकुर की अगुवाई में हुई रेड के दौरान बंगाल निवासी बिलास विश्वास को रेटा गांव में बिना किसी लाइसेंस या मेडिकल डिग्री के क्लीनिक चलाते पकड़ा गया था।
रेड के समय वह एक मरीज की बवासीर (Piles) की सर्जरी कर रहा था। उसके पास से भारी मात्रा में दवाइयों का स्टॉक बरामद हुआ था, जिसे रखने या बेचने का उसके पास कोई कानूनी अधिकार नहीं था।
राज्य दवा नियंत्रक मनीष कपूर ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा रेटा में फर्जी डॉक्टर के क्लीनिक से ली गई एंटीबायोटिक दवा का सैंपल फेल पाया गया है। इस संबंध में संबंधित केमिस्ट और दिल्ली की फार्मेसी कंपनी को नोटिस जारी कर दिए गए हैं। बिना लाइसेंस और मानकों के विपरीत दवा बेचने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।