शिमला।
हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति को लेकर स्थिति तनावपूर्ण होती जा रही है। तेल कंपनियों द्वारा आपूर्ति पर लगाई गई बंदिशों के कारण प्रदेश के कई जिलों में पेट्रोल पंपों पर दबाव बढ़ गया है। सीमित ईंधन मिलने के कारण उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, वहीं आने वाले समय में परिवहन व्यवस्था के चरमराने का खतरा भी पैदा हो गया है।
जानकारी के अनुसार, भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने अपने डीलरों को ईंधन की आपूर्ति सीमित कर दी है। कंपनियां इस रणनीति पर काम कर रही हैं कि पंप पूरी तरह खाली न हों, इसलिए उन्हें केवल उतनी ही मात्रा दी जा रही है जिससे काम चल सके।
इसके विपरीत, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) से फिलहाल आपूर्ति सामान्य बनी हुई है। हालांकि, अन्य कंपनियों की सप्लाई प्रभावित होने का सीधा असर अब रिलायंस जियो-बीपी और नायरा एनर्जी जैसे निजी पंपों पर भी पड़ रहा है, जहाँ अचानक वाहनों की कतारें लंबी होने लगी हैं।
जिन पेट्रोल पंप संचालकों के पास अपने टैंकर नहीं हैं, उन्हें सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है क्योंकि टैंकरों की उपलब्धता भी प्रभावित हुई है। यदि किसी एक इलाके में एक कंपनी का पंप खाली होता है, तो सारा दबाव पास के दूसरे पंपों पर आ जाता है, जिससे व्यवस्था बिगड़ रही है।
हिमाचल की भौगोलिक स्थिति के कारण यहाँ की पूरी रसद और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पेट्रोल-डीजल पर टिकी है। सीमित आपूर्ति भविष्य में बड़ी समस्या बन सकती है।
हिमाचल पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन के अध्यक्ष सुकुमार सिंह ने जमीनी स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा उत्पाद सीमित मात्रा में मिल रहा है। इंडियन ऑयल की स्थिति ठीक है, लेकिन भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम से आपूर्ति सीमित है।
कंपनियों द्वारा पंपों को पूरी तरह सूखने से बचाने के लिए केवल 'राशनिंग' की जा रही है, जो हिमाचल जैसे राज्य के लिए सही संकेत नहीं है।
डीलरों का मानना है कि इस संकट से निपटने के लिए खाद्य एवं आपूर्ति विभाग और डीलरों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता है। जानकारों का कहना है कि प्रशासन को जमीनी हकीकत समझते हुए तेल कंपनियों के साथ बातचीत करनी चाहिए ताकि पर्यटन सीजन और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए ईंधन की कमी न हो।