शिमला I
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने प्रदेश की खस्ताहाल सड़कों, विशेष रूप से शिमला-ठियोग-नारकंडा नेशनल हाईवे की दयनीय स्थिति पर गहरा रोष प्रकट किया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और लोक निर्माण विभाग (PWD) की कार्यप्रणाली को आड़े हाथों लिया।
अदालत ने सड़क की बदहाली पर कड़ा संज्ञान लेते हुए पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर-इन-चीफ और NHAI के मुख्य अभियंता को अगली सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया है। कोर्ट ने इन अधिकारियों से एक स्पष्ट रोडमैप मांगा है कि ढली से नारकंडा तक की सड़क को कब तक पूरी तरह से दुरुस्त कर दिया जाएगा।
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, ये सड़कें हैं या धूल के गुबार? अदालत ने चिंता जताई कि खराब सड़कों की वजह से न केवल वाहनों को भारी नुकसान हो रहा है, बल्कि उड़ती धूल से पर्यावरण और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
मामले में पेश की गई विधिक सेवा प्राधिकरण की रिपोर्ट के अनुसार फागू के पास अभी भी 2-3 किलोमीटर का हिस्सा बेहद खराब स्थिति में है। मरम्मत में अत्यधिक देरी के कारण सड़क की निचली परतें (Base layers) पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि वर्तमान में किए जा रहे पैचवर्क के ज्यादा समय तक टिकने की उम्मीद नहीं है, इसलिए पूरी सड़क के पुनर्निर्माण की सिफारिश की गई है।
अदालत ने याचिका का दायरा बढ़ाते हुए अब ठियोग से नारकंडा तक की सड़क को भी इसमें शामिल कर लिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य के सुस्त रवैये के कारण काम में देरी हो रही है, जिसका सीधा नुकसान आम जनता को उठाना पड़ रहा है। उल्लेखनीय है कि यह मार्ग हिमाचल की एप्पल बेल्ट के लिए लाइफलाइन माना जाता है। मामले की अगली सुनवाई 21 मई 2026 को निर्धारित की गई है।