एक दशक से बिगड़ रही स्थिति, 300 से अधिक मशीनें और वाहन स्क्रैपिंग में हुए थे बंद; अब तक करीब 60 प्रतिशत ही हो पाई भरपाई
कांगड़ा और चंबा जिलों में लोक निर्माण विभाग (PWD) की मशीनरी और वाहनों के रखरखाव की जिम्मेदारी संभालने वाले यांत्रिक मंडल धर्मशाला में कर्मचारियों की भारी कमी सामने आई है।
मंडल में कुल 330 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 58 कर्मचारी ही सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में स्वीकृत पदों के मुकाबले महज 17 से 18 प्रतिशत कर्मचारी उपलब्ध हैं। तकनीकी और फील्ड स्टाफ की कमी के चलते विभाग को कई महत्वपूर्ण कार्यों के लिए बाहरी ठेकेदारों और फर्मों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
यांत्रिक मंडल धर्मशाला का कार्यक्षेत्र कांगड़ा और चंबा जिलों के पूरे क्षेत्र में फैला है। इसमें भरमौर और पांगी-किलाड़ जैसे जनजातीय क्षेत्र भी शामिल हैं। मंडल के तहत धर्मशाला, पालमपुर, नूरपुर और चंबा में प्रमुख वर्कशॉप संचालित की जाती हैं।
इनका मुख्य कार्य विभागीय मशीनरी और वाहनों का रखरखाव, मरम्मत और संचालन करना है। इसके अलावा स्टील ट्रस ब्रिज, बेली ब्रिज और फुटब्रिज की लॉन्चिंग, स्थापना और हटाने जैसे महत्वपूर्ण कार्य भी इसी मंडल के जिम्मे हैं।
एक दशक से लगातार बिगड़ रही कर्मचारियों की स्थिति
यांत्रिक मंडल में कर्मचारियों की कमी पर चिंता जताते हुए अधिशासी अभियंता रोहित राज किरण ने बताया कि यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है और करीब एक दशक में स्थिति लगातार बिगड़ी है। उन्होंने कहा कि कार्यालय के लिपिकीय कार्य किसी तरह प्रबंधित किए जा रहे हैं, लेकिन तकनीकी और फील्ड स्टाफ की कमी के कारण विभागीय कार्यों को सुचारू रूप से चलाना मुश्किल हो रहा है।
इस समस्या को लेकर विभागीय अधिकारियों और सरकार के उच्चाधिकारियों तक लगातार मांग पहुंचाई जाती रही है, लेकिन अब तक अपेक्षित स्तर पर कार्रवाई नहीं हो पाई है। उन्होंने कहा कि विभाग को सभी रिक्त पद भरने के साथ कामकाज सामान्य रूप से चलाने के लिए न्यूनतम आवश्यक स्टाफ भी उपलब्ध करवाना जरूरी है।
वर्कशॉप के आधुनिकीकरण की जरूरत
कर्मचारियों की कमी का असर वर्कशॉप में होने वाले मरम्मत कार्यों पर भी पड़ रहा है। अधिशासी अभियंता के अनुसार, पहले पर्याप्त स्टाफ होने के कारण विभाग कई बड़े मरम्मत कार्य अपनी वर्कशॉप में ही कर लेता था। अब तकनीकी कर्मचारियों की कमी के चलते बड़े और विशेष मरम्मत कार्यों के लिए बाहरी ठेकेदारों और फर्मों पर निर्भरता बढ़ गई है।
उन्होंने कहा कि समय के साथ तकनीक में बदलाव आया है, लेकिन विभाग की वर्कशॉप उसी अनुरूप अपग्रेड नहीं हो पाई हैं। वर्कशॉप का आधुनिकीकरण जरूरी है, ताकि मशीनरी और वाहनों की मरम्मत के साथ नई तकनीक से जुड़े कार्य भी विभाग अपने स्तर पर कर सके।
आउटसोर्सिंग के माध्यम से आवश्यक सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए भी उच्चाधिकारियों को प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन इस दिशा में अभी तक ठोस प्रगति नहीं हुई है।
300 से अधिक मशीनें और वाहन हुए थे बंद
विभागीय मशीनरी और वाहनों की स्थिति के बारे में रोहित राज किरण ने बताया कि कांगड़ा और चंबा जिलों में वर्तमान में लगभग 271 से 272 वर्किंग यूनिट्स कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में केंद्र और प्रदेश सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप लागू स्क्रैपिंग नीति के तहत 15 वर्ष या उससे अधिक पुराने वाहनों और मशीनों को कंडम
किया गया था। इसके चलते विभाग की 300 से अधिक यूनिट्स बंद हो गई थीं, जिससे कामकाज पर बड़ा असर पड़ा।
करीब 60 प्रतिशत तक ही हो पाई भरपाई
अधिशासी अभियंता के अनुसार, पिछले करीब तीन वर्षों में बंद हुई यूनिट्स की भरपाई के लिए लगभग 60 प्रतिशत तक रिप्लेसमेंट हो पाई है। इसके तहत विभाग को नए एक्सकेवेटर-कम-लोडर, टिप्पर और बोलेरो कैंपर जैसे वाहन उपलब्ध करवाए गए हैं। हालांकि, पुरानी मशीनरी और वाहनों के बंद होने से पैदा हुई कमी को पूरी तरह दूर करने के लिए अभी और प्रयासों की जरूरत है।
इलेक्ट्रिक वाहनों के रखरखाव की भी संभावना
रोहित राज किरण ने बताया कि प्रदेश सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और हरित ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ने पर जोर दे रही है। ऐसे में यांत्रिक मंडल की वर्कशॉप में इलेक्ट्रिक वाहनों के रखरखाव से संबंधित संयंत्र स्थापित करने और चार्जिंग स्टेशन लगाने की संभावनाएं भी हैं।
उन्होंने कहा कि यदि वर्कशॉप को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाए और न्यूनतम आवश्यक तकनीकी स्टाफ उपलब्ध करवाया जाए, तो विभाग इन सुविधाओं के संचालन और रखरखाव में भी योगदान दे सकता है।
विभाग के सामने दोहरी चुनौती
अधिशासी अभियंता ने कहा कि विभाग के सामने एक ओर मशीनरी और वाहनों की जरूरतों के अनुरूप व्यवस्था करने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों की कमी और पुरानी वर्कशॉप के आधुनिकीकरण पर भी ध्यान देना जरूरी है। यदि इन दोनों पहलुओं पर समय रहते कदम उठाए जाते हैं, तो विभाग की कार्यक्षमता बढ़ाने के साथ बाहरी एजेंसियों पर निर्भरता भी कम की जा सकती है।
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