शिमला I
वर्ष 2022 के बहुचर्चित हिमाचल प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अपनी जांच पूरी करने के बाद बड़ी कार्रवाई की संस्तुति की है।
सीबीआई ने इस प्रकरण में गंभीर लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के दोषी पाए गए चार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने की सिफारिश की है। इस संबंध में सीबीआई की ओर से पुलिस महानिदेशक (DGP) हिमाचल प्रदेश को विस्तृत रिपोर्ट भेज दी गई है।
सीबीआई की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 27 मार्च 2022 को हुई परीक्षा का प्रश्नपत्र गाजियाबाद स्थित एक निजी प्रिंटिंग प्रेस से लीक हुआ था।
जांच में सामने आया कि प्रिंटिंग प्रेस का चयन बिना किसी औपचारिक टेंडर प्रक्रिया के किया गया।प्रश्नपत्र के अंतिम मसौदे को मंजूरी देने के लिए आधिकारिक प्रोटोकॉल के बजाय व्हाट्सएप का सहारा लिया गया।
प्रश्नपत्रों को एक अधिकारी से दूसरे को बिना सील किए और बिना किसी रिकॉर्ड के सौंपा गया। छपाई के दौरान कई दिनों तक प्रेस में कोई उचित निगरानी नहीं रखी गई, जिसका फायदा उठाकर 19 मार्च 2022 को पेपर लीक कर दिया गया।
सीबीआई के अनुसार, बिहार के भारत कुमार यादव और अरविंद कुमार जैसे आरोपियों ने साजिश रचकर पेपर चोरी किया। परीक्षा से ठीक एक दिन पहले (26 मार्च 2022) हिमाचल, पंजाब और हरियाणा के विभिन्न होटलों में उम्मीदवारों को इकट्ठा कर हल किया हुआ प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया। इस मामले में सीबीआई अब तक 88 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र (Charge-sheet) दाखिल कर चुकी है।
सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि भर्ती बोर्ड और जांच टीम के स्तर पर गंभीर खामियां रही हैं। तीन अधिकारियों के खिलाफ 'मेजर पेनल्टी' (बड़ा दंड) के लिए नियमित विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
एक अधिकारी पर आरोप है कि उन्होंने जांच के दौरान महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज किया और मामले से जुड़े एक बिचौलिए की भूमिका को छिपाने की कोशिश की। प्रिंटिंग कमेटी के सदस्यों ने अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन सही ढंग से नहीं किया, जिससे पूरी भर्ती प्रक्रिया कलंकित हुई।
सीबीआई की इस रिपोर्ट के बाद हिमाचल प्रदेश पुलिस और भर्ती बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। माना जा रहा है कि डीजीपी को भेजी गई इस संस्तुति के बाद विभाग में बड़ी हलचल देखने को मिलेगी। इस कड़ी कार्रवाई का उद्देश्य भविष्य में होने वाली सरकारी भर्तियों की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करना है।