लखनपुर में पोषण माह कार्यक्रम में बोले उपायुक्त, स्थानीय पौष्टिक आहार से कुपोषण और एनीमिया की रोकथाम पर दिया जोर
बिलासपुर में पोषण माह अभियान के तहत जिला महिला एवं बाल विकास विभाग के सौजन्य से आंगनवाड़ी केंद्र लखनपुर में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। इस दौरान उन्होंने आंगनवाड़ी केंद्र का निरीक्षण कर बच्चों को उपलब्ध करवाई जा रही विभिन्न सुविधाओं की जानकारी हासिल की।
उपायुक्त ने आंगनवाड़ी केंद्र में अध्ययनरत छोटे बच्चों, उनके अभिभावकों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और पर्यवेक्षकों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने गोद भराई की रस्म भी निभाई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राहुल कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय पोषण माह मनाने का उद्देश्य केवल लोगों को पोषण के प्रति जागरूक करना नहीं, बल्कि उनके खान-पान और जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाना भी है। उन्होंने कहा कि इससे कुपोषण और एनीमिया जैसी समस्याओं की प्रभावी रोकथाम में मदद मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि बच्चों और गर्भवती महिलाओं को दिए जा रहे भोजन में पोषक तत्वों की मात्रा के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। भोजन की मात्रा जितनी महत्वपूर्ण है, उतनी ही उसकी पोषण गुणवत्ता भी जरूरी है।
उपायुक्त ने स्थानीय और पारंपरिक खाद्य पदार्थों को दैनिक आहार का हिस्सा बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमारी पारंपरिक खान-पान पद्धति में कई ऐसे स्थानीय खाद्य पदार्थ शामिल रहे हैं, जो पोषण की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। बदलती जीवनशैली के कारण इन खाद्य पदार्थों से दूरी बढ़ रही है और बाहर के भोजन पर निर्भरता बढ़ रही है।
उन्होंने भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियां, स्थानीय अनाज, दालें, मौसमी फल, दूध और अन्य पोषणयुक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया। महिलाओं और गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की समस्या पर चिंता जताते हुए उन्होंने संतुलित आहार, पर्याप्त आयरन और आवश्यक पोषक तत्वों की उपलब्धता के साथ समय पर स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देने की बात कही।
राहुल कुमार ने कहा कि जीवन के प्रारंभिक चरण में बच्चे का शारीरिक और मस्तिष्क विकास तेजी से होता है। ऐसे में बच्चों को पोषक और प्रोटीनयुक्त आहार देना जरूरी है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों के भोजन की गुणवत्ता और विविधता पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि बच्चे के विकास की प्रारंभिक अवस्था को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उचित पोषण, देखभाल और स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास की मजबूत नींव रखी जा सकती है। उन्होंने अभिभावकों, माताओं और परिवारों से बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं के आहार में पोषण की गुणवत्ता को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि सही उम्र में सही पोषण स्वस्थ बचपन, बेहतर शिक्षा और मजबूत भविष्य की आधारशिला है। कुपोषण और एनीमिया के खिलाफ जन-जागरूकता अभियान को सफल बनाने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी जरूरी है।
इससे पहले जिला कार्यक्रम अधिकारी नरेंद्र कुमार ने मुख्यातिथि का स्वागत किया और पोषण माह अभियान से संबंधित विस्तृत जानकारी दी।
मिशन दृष्टि के तहत प्राथमिक विद्यालय का दौरा
कार्यक्रम के बाद उपायुक्त राहुल कुमार ने राजकीय प्राथमिक पाठशाला लखनपुर का दौरा किया। यहां उन्होंने मिशन दृष्टि के तहत बच्चों की आंखों की जांच से संबंधित विस्तृत जानकारी हासिल की।
उपायुक्त ने कहा कि मिशन दृष्टि के तहत आठ वर्ष तक की आयु के बच्चों की दृष्टि की जांच कर प्रारंभिक स्तर पर आंखों से जुड़ी समस्याओं की पहचान पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि बच्चों को कक्षा में पढ़ने, बोर्ड देखने, ध्यान केंद्रित करने या बार-बार सिरदर्द जैसी समस्याएं आती हैं, तो अभिभावकों और शिक्षकों को इसे गंभीरता से लेते हुए समय पर नेत्र जांच करवानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन, टीवी और अन्य डिजिटल उपकरणों के अत्यधिक इस्तेमाल से बच्चों का स्क्रीन टाइम बढ़ रहा है, जिसका प्रभाव आंखों के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
निरीक्षण के दौरान कई बच्चों में दृष्टि संबंधी समस्याओं के संकेत पाए गए, जिनमें मायोपिया और हाइपरमेट्रोपिया जैसी समस्याएं शामिल हैं। ऐसे बच्चों के अभिभावकों और शिक्षकों को विस्तृत जांच तथा आवश्यक उपचार के लिए फॉलो-अप सुनिश्चित करने की सलाह दी गई।
उपायुक्त ने अभिभावकों से बच्चों को मोबाइल फोन से दूर रखने, उनकी शारीरिक गतिविधियों में भागीदारी बढ़ाने और मिशन दृष्टि के तहत आंखों की जांच करवाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि समय पर स्क्रीनिंग से आंखों की समस्या की प्रारंभिक अवस्था में पहचान कर आवश्यक उपचार उपलब्ध करवाया जा सकता है। इससे बच्चों की पढ़ाई, एकाग्रता और समग्र स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
इस अवसर पर स्कूल का स्टाफ भी मौजूद रहा।
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