बड़ू साहिब में अकाल अकादमी का 40वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया गया; 27 वाद्य यंत्रों की सिम्फनी, शबद-कीर्तन, गतका और पंजाबी नाटक ने मोहा मन
बड़ू साहिब में स्थित अकाल अकादमी ने शिक्षा और संस्कारों के क्षेत्र में अपनी गौरवशाली यात्रा के 40 वर्ष पूरे कर लिए हैं। वर्ष 1986 में पद्मश्री संत बाबा इकबाल सिंह ने महज पांच बच्चों के साथ इस संस्थान की नींव रखी थी।
उनका उद्देश्य बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ आध्यात्मिकता, ब्रह्मज्ञान, नैतिक मूल्यों और मानवता की शिक्षा देकर अच्छे इंसान तैयार करना था। इसी संकल्प को आगे बढ़ाते हुए अकाल अकादमी का 40वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया गया।
पांच बच्चों से शुरू हुई शिक्षा की अनूठी यात्रा
पद्मश्री संत बाबा इकबाल सिंह ने कृषि विभाग में 36 वर्षों की सरकारी सेवा पूरी करने के बाद शिक्षा के क्षेत्र में सेवा का रास्ता चुना। उनका मानना था कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करना या रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों का चरित्र निर्माण करना और उन्हें मानवता की सेवा के लिए प्रेरित करना
भी है। इसी सोच के साथ द कलगीधर ट्रस्ट के अंतर्गत अकाल अकादमी की स्थापना की गई। संस्थान में आधुनिक शिक्षा के साथ आध्यात्मिक चिंतन, गुरबाणी, नैतिक मूल्यों, अनुशासन और सेवा भावना को भी विशेष महत्व दिया जाता है।
भव्य समारोह में विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभा
स्थापना दिवस समारोह में द कलगीधर ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं इटरनल यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति डॉ. देविंदर सिंह तथा ट्रस्ट के उपाध्यक्ष जगजीत सिंह काका वीर सहित अन्य गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।
समारोह स्थल पर पहुंचने पर अतिथियों का स्वागत किया गया। एनसीसी की छात्राओं और अकाल अकादमी डिफेंस ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, चुन्नी कलां के विद्यार्थियों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर अतिथियों का अभिनंदन किया। इसके बाद मशाल प्रज्वलन के साथ समारोह का शुभारंभ हुआ। विद्यार्थी परिषद और अकाल मॉडल स्कूल के विद्यार्थियों का शपथ ग्रहण समारोह भी आयोजित किया गया।
27 वाद्य यंत्रों की सिम्फनी और शबद-कीर्तन रहे आकर्षण
समारोह में संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने विशेष आकर्षण पैदा किया। शबद-कीर्तन की मधुर ध्वनि से वातावरण भक्तिमय हो गया, वहीं 27 वाद्य यंत्रों पर आधारित सिम्फनी में करीब 300 विद्यार्थियों ने भाग लेकर अपनी संगीत प्रतिभा का परिचय दिया।
विद्यार्थियों के सामूहिक तालमेल, अनुशासन और संगीत कौशल ने दर्शकों को प्रभावित किया। अकाल अकादमी की चार दशक की विकास यात्रा पर आधारित लघु नाटिका और पंजाब की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती प्रस्तुतियों को भी सराहना मिली।
कार्यक्रम के दौरान रिले दौड़, आत्मरक्षा प्रदर्शन, भारोत्तोलन और किंडरगार्टन के बच्चों के लिए मनोरंजक खेलों का आयोजन किया गया। पारंपरिक मार्शल आर्ट गतका के प्रदर्शन ने भी दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। शिक्षा और खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र, मेडल और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
पंजाबी नाटक ‘भगत नामदेव जी’ ने दिया आध्यात्मिकता का संदेश
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण विद्यार्थियों और आध्यात्मिक अध्ययन विभाग की ओर से तैयार, अभिनीत और निर्देशित पंजाबी नाटक ‘भगत नामदेव जी’ रहा। नाटक के माध्यम से भक्ति परंपरा, आध्यात्मिक विचारों और मानवीय मूल्यों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। विद्यार्थियों के अभिनय ने दर्शकों को प्रभावित किया और आध्यात्मिकता तथा नैतिक मूल्यों के महत्व को रेखांकित किया।
समारोह में शैक्षणिक सत्र 2025-26 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। साथ ही अकादमी की वार्षिक उपलब्धियों और चार दशक की विकास यात्रा को भी प्रस्तुत किया गया।
आधुनिक शिक्षा के साथ संस्कारों पर जोर
द कलगीधर ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. देविंदर सिंह ने कहा कि अकाल अकादमी की स्थापना संत बाबा इकबाल सिंह के उस सपने का हिस्सा थी, जिसके तहत आधुनिक ज्ञान के साथ अच्छे संस्कारों, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना से जुड़े विद्यार्थियों का निर्माण करना था।
उन्होंने कहा कि संस्थान का उद्देश्य केवल किताबी शिक्षा देना नहीं, बल्कि बच्चों को ब्रह्मज्ञान, अनुशासन, सेवा और मानवता का महत्व समझाना भी है।
उन्होंने बताया कि बड़ू साहिब में पहली कक्षा से लेकर पीएचडी तक शिक्षा उपलब्ध कराने का प्रयास इसी व्यापक शैक्षणिक दृष्टिकोण का हिस्सा है। अकाल अकादमी के 40 वर्ष संत बाबा इकबाल सिंह की दूरदर्शी सोच, समर्पण और सेवा भावना के प्रतीक हैं।
अकाल अकादमी की प्रिंसिपल डॉ. नीलम कौर ने भी अपने संबोधन में विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण, अनुशासन, आध्यात्मिकता और नैतिक मूल्यों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने संस्थान की चार दशक की यात्रा को संत बाबा इकबाल सिंह के शिक्षा संबंधी दृष्टिकोण और सेवा भावना से जुड़ा प्रयास बताया।
अकाल अकादमी में सीबीएसई के साथ अंतरराष्ट्रीय बैकलॉरिएट (आईबी) और आईजीसीएसई जैसे पाठ्यक्रमों के माध्यम से भी शिक्षा प्रदान की जा रही है। संस्थान का उद्देश्य विद्यार्थियों को शैक्षणिक रूप से सक्षम बनाने के साथ उनमें नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास, संवेदनशीलता और समाज सेवा की भावना विकसित करना है,
ताकि वे जीवन में सफलता प्राप्त करने के साथ मानवता के प्रति अपने दायित्वों को भी समझ सकें।
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