मंडी।
भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के दौरान प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार ने प्रदेश सरकार के खिलाफ 'राजनैतिक प्रस्ताव' प्रस्तुत करते हुए तीखा हमला बोला। उन्होंने वर्तमान सुक्खू सरकार के कार्यकाल को भ्रष्टाचार, आर्थिक कुप्रबंधन और जनविरोधी नीतियों का "खुला दस्तावेज" करार दिया।
विपिन परमार ने सरकार की कार्यप्रणाली पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस राज में हिमाचल प्रदेश आर्थिक अनिश्चितता के गर्त में गिर चुका है। प्रदेश पर कर्ज का बोझ बढ़कर लगभग ₹1.8 लाख करोड़ तक पहुँच गया है।
सरकार विकास के बजाय केवल नया कर्ज लेकर खर्च चलाने की नीति अपना रही है। सत्ता में आते ही 2000 से अधिक जनहित के संस्थान बंद कर दिए गए, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं।
हिमकेयर और सहारा जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं का भुगतान महीनों से लंबित है। अस्पतालों की हालत खुद 'वेंटिलेटर' पर है, जबकि सरकार 'रोबोटिक सर्जरी' के हवाई दावे कर रही है।
परमार ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा लाखों करोड़ की सहायता के बावजूद प्रदेश सरकार उसे धरातल पर उतारने में विफल रही है। उन्होंने जनता पर पड़े आर्थिक बोझ को गिनाया।
भारी वैट (VAT) लगाकर ईंधन की कीमतें बढ़ाई गईं। स्टाम्प ड्यूटी, एंट्री टैक्स, बिजली-पानी के बिल और बस किरायों में वृद्धि ने हर वर्ग की कमर तोड़ दी है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और जल जीवन मिशन जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स की गति प्रदेश में सुस्त पड़ गई है।
राजनैतिक प्रस्ताव में 'मित्रवाद' और 'भाई-भतीजावाद' पर कड़ा प्रहार किया गया। विपिन परमार ने कहा सरकार संवैधानिक संस्थाओं (राज्यपाल और चुनाव आयोग) से टकराव मोल ले रही है। सीपीएस जैसी असंवैधानिक नियुक्तियों को बचाने के लिए सरकारी खजाने का दुरुपयोग किया गया। विजिलेंस को RTI के दायरे से बाहर करना सरकार की भ्रष्टाचार छिपाने की मंशा को साफ दर्शाता है।
प्रस्ताव के अंत में भाजपा ने संकल्प लिया कि वे कांग्रेस सरकार के हर घोटाले और जनविरोधी निर्णय का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करेंगे। भाजपा अब इस "विफल सरकार" के खिलाफ प्रदेशव्यापी व्यापक जन आंदोलन खड़ा करेगी। विपिन परमार ने स्पष्ट किया कि यह केवल राजनीतिक संघर्ष नहीं, बल्कि हिमाचल के भविष्य को बचाने की निर्णायक लड़ाई है।