हमीरपुर।
हमीरपुर जिले के बड़सर उपमंडल के अंतर्गत आने वाले समोह गांव की एक दो वर्षीय मासूम बच्ची प्रियांशी जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रही है। एक ऐसी बीमारी जिसका इलाज दिहाड़ी-मजदूरी करने वाले माता-पिता के बस से बाहर हो चुका है, अब मासूम की मुस्कान बचाने के लिए परिवार ने सरकार और समाज के दानी सज्जनों की ओर हाथ फैलाए हैं।
क्या है प्रियांशी की बीमारी?
दो वर्षीय प्रियांशी एक अजीब और गंभीर बीमारी से पीड़ित है, जिसमें अचानक उसका पूरा शरीर पीला पड़ जाता है। पिछले दो वर्षों से उसका इलाज पीजीआई (PGI) चंडीगढ़ में चल रहा है।
अब हालत ऐसी है कि मासूम को हफ्ते में दो से तीन बार पीजीआई ले जाना पड़ता है। प्रियांशी के पिता दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। जो कुछ जमा-पूंजी थी, वह इलाज में खर्च हो चुकी है। अब परिवार के पास चंडीगढ़ आने-जाने और दवाइयों के लिए पैसे नहीं बचे हैं।
प्रियांशी की माँ पल्लवी शर्मा ने रुआंसे गले से बताया कि वे पिछले दो साल से अपनी बेटी को ठीक करने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं। पल्लवी ने कहा जो कुछ हमारे पास था, हमने बेटी के इलाज पर लगा दिया। लेकिन अब हम पूरी तरह असहाय हो चुके हैं। हमें अपनी बेटी को तड़पते हुए देखना पड़ रहा है क्योंकि अब आगे के इलाज के लिए हमारे पास पैसे नहीं हैं।
मुख्यमंत्री और दानी सज्जनों से अपील
पल्लवी शर्मा ने प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और समाज के दानी लोगों से बेटी के इलाज के लिए आर्थिक मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने बताया कि स्थानीय विधायक इन्द्रदत्त लखनपाल ने पहले भी उनकी मदद की है, जिसके लिए परिवार उनका आभारी है। हालांकि, बीमारी की गंभीरता और लगातार बढ़ते खर्च को देखते हुए और अधिक सहायता की दरकार है।
यदि कोई दानी सज्जन या संस्था इस मासूम की जान बचाने के लिए हाथ आगे बढ़ाना चाहता है, तो वे परिवार से संपर्क कर सकते हैं। आपकी एक छोटी सी मदद प्रियांशी को नया जीवन दे सकती है।