शिमला।
हिमाचल प्रदेश में नया घर बनाने का सपना देख रहे आम आदमी की जेब पर एक बार फिर महंगाई की मार पड़ी है। प्रदेश के बाजारों में निर्माण सामग्री की कीमतों में अचानक बड़ा उछाल देखने को मिला है। जानकारी के अनुसार, सीमेंट की प्रति बोरी पर ₹15 और सरिये के दाम में ₹1,000 प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
प्रदेश में सीमेंट कंपनियों ने निर्माण सामग्री की लागत और मांग में वृद्धि का हवाला देते हुए दाम बढ़ा दिए हैं। ऊना और मंडी जैसे जिलों में पहले जो सीमेंट की बोरी ₹375 में मिल रही थी, अब उसकी कीमत बढ़कर ₹390 तक पहुँच गई है। इस बढ़ोतरी से सरकारी और निजी दोनों तरह के निर्माण कार्यों का बजट बिगड़ गया है।
सीमेंट के साथ-साथ लोहे (सरिया) की कीमतों में भी भारी इजाफा हुआ है। पिछले कुछ हफ्तों में सरिये के दाम ₹5,700 से बढ़कर अब ₹6,200 से ₹6,500 प्रति क्विंटल तक पहुँच गए हैं।
यानी सीधे तौर पर ₹1,000 तक की वृद्धि दर्ज की गई है। घर की छतों पर इस्तेमाल होने वाली चादरों की कीमतों में भी ₹15 प्रति पीस की बढ़त हुई है। रेत फिलहाल ₹20 प्रति फीट और बजरी ₹14 से ₹15 प्रति फीट के हिसाब से मिल रही है, जिससे कुल निर्माण लागत में 15-20% का इजाफा हो गया है।
निर्माण सामग्री की कीमतों में आई इस तेजी ने लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। सीमेंट और सरिये के दाम बढ़ने से चल रहे प्रोजेक्ट्स का बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है।
लेबर और मटेरियल की लागत बढ़ने से अब तय समय में काम पूरा करना मुश्किल होगा। महंगाई के इस दौर में गरीब आदमी का अपना घर बनाना अब एक दुर्लभ सपना होता जा रहा है। सरकार को इन कीमतों पर नियंत्रण रखना चाहिए।"
बाजार विशेषज्ञों और विक्रेताओं के अनुसार, कच्चे माल की ढुलाई (Freight) में बढ़ोतरी और कोयले के दामों में हुए उछाल का सीधा असर सीमेंट और ईंट भट्ठा उद्योग पर पड़ा है। इसके अलावा, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में बढ़ती मांग को भी इस बढ़ोतरी की एक वजह माना जा रहा है।