शिमला।
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में एक बार फिर सांप्रदायिक और वैचारिक तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। मामला प्रसिद्ध राम मंदिर हॉल (सूद सभा द्वारा संचालित) में एक मुस्लिम युवती के निकाह के आयोजन से जुड़ा है। जहाँ हिंदू संघर्ष समिति इस आयोजन के खिलाफ सड़कों पर उतरने की तैयारी में है, वहीं सूद सभा ने इसे आपसी भाईचारे की पुरानी परंपरा बताया है।
क्या है पूरा विवाद?
शिमला की ईदगाह कॉलोनी के निवासी मोहम्मद नासिर की बेटी का निकाह आगामी 11 अप्रैल को राम मंदिर हॉल में होना तय हुआ है। जैसे ही इसकी जानकारी सार्वजनिक हुई, हिंदू संघर्ष समिति ने इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया। समिति का तर्क है कि मंदिर परिसर की संपत्ति का उपयोग दूसरे धर्म के धार्मिक कार्यों के लिए करना उनकी आस्था के खिलाफ है।
हिंदू संघर्ष समिति के नेताओं, विजय शर्मा और मदन ठाकुर ने सूद सभा को ज्ञापन सौंपते हुए अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि यह निकाह मंदिर परिसर में होता है, तो समिति उग्र प्रदर्शन करेगी। उन्होंने प्रतीकात्मक विरोध के रूप में मुंडन करवाने और सुअरों की बारात निकालने जैसी कड़वी चेतावनी भी दी है।
दूसरी ओर, सूद सभा शिमला के अध्यक्ष राजीव सूद ने इस विवाद पर हैरानी जताई है। उनके मुख्य तर्क इस प्रकार हैं पिछले 5 वर्षों में इसी हॉल में 15 से अधिक मुस्लिम निकाह संपन्न हो चुके हैं।
हॉल में मांस, मछली और मदिरा पर पूरी तरह प्रतिबंध है, जिसका सभी पालन करते हैं। राजीव सूद के अनुसार, देश का संविधान और सभा के नियम धर्म के आधार पर किसी को बुकिंग देने से नहीं रोकते।
हम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं। यह हॉल सामाजिक कार्यों के लिए है और पहले भी यहाँ निकाह होते रहे हैं। हम स्वच्छता और मर्यादा का पूरा ध्यान रखते हैं। — राजीव सूद, अध्यक्ष, सूद सभा
विवाद को बढ़ता देख सूद सभा ने आज (मंगलवार) एक महत्वपूर्ण आपातकालीन बैठक बुलाई है। इस बैठक में हिंदू संगठनों की आपत्तियों और आगामी निकाह की बुकिंग को लेकर अंतिम फैसला लिया जा सकता है।