बिलासपुर में 18 संगठनों की राज्यस्तरीय बैठक, एरियर-पेंशन भुगतान समेत कई मांगों पर चर्चा; नवंबर में ब्लॉक से जिला स्तर तक आंदोलन की चेतावनी
हिमाचल प्रदेश के पेंशनर्स ने अपनी लंबित वित्तीय देनदारियों और विभिन्न मांगों को लेकर प्रदेश सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। बिलासपुर के जिला परिषद हॉल में हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति की राज्यस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्रदेशभर से समिति से जुड़े 18 संगठनों के पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया।
बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष सुरेश ठाकुर ने की।
बैठक में पेंशनर्स की लंबित मांगों और वित्तीय देनदारियों पर विस्तार से चर्चा की गई। समिति ने आरोप लगाया कि पेंशनर्स की कई देनदारियां लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन सरकार की ओर से इनके भुगतान को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। समिति ने सरकार को 15 दिन का अल्टीमेटम देते हुए संयुक्त संघर्ष समिति के साथ बैठक कर मांगों पर चर्चा करने की मांग की है।
एरियर और संशोधित देनदारियों के भुगतान की मांग
समिति अध्यक्ष सुरेश ठाकुर ने कहा कि 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 तक सेवानिवृत्त कर्मचारियों के संशोधित वेतनमान के आधार पर एरियर, पेंशन एरियर, लीव इनकैशमेंट और ग्रेच्युटी की संशोधित अदायगी लंबित है। उन्होंने कहा कि इन देनदारियों को लेकर पेंशनर्स लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अभी तक स्थायी समाधान नहीं हुआ है।
बैठक में पेंशनर्स ने 15 प्रतिशत महंगाई भत्ता देने, चिकित्सा भत्तों की लंबित अदायगी करने और 3 प्रतिशत डीए की लंबित किस्त जारी करने की मांग उठाई। इसके अलावा 50 हजार रुपये के एरियर की देनदारी चुकाने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई।
HRTC और बिजली बोर्ड के सेवानिवृत्त कर्मचारियों की मांगें
पेंशनर्स ने हिमाचल पथ परिवहन निगम के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को नियमित पेंशन देने की मांग भी उठाई। वहीं, बिजली बोर्ड के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग की गई।
इसके अलावा शहरी नगर निकायों के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को वर्ष 2016 से पेंशन देने और 18 कॉरपोरेट सेक्टर के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन के दायरे में लाने की मांग भी बैठक में उठाई गई।
अक्टूबर से जन जागरण अभियान, नवंबर में आंदोलन तेज करने की तैयारी
सुरेश ठाकुर ने कहा कि सरकार को मांगों पर कार्रवाई के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। यदि इस अवधि में सरकार संयुक्त संघर्ष समिति के साथ बैठक कर मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं करती है तो अक्टूबर में प्रदेशभर में जन जागरण अभियान चलाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इसके बाद नवंबर में ब्लॉक स्तर से लेकर जिला स्तर तक आंदोलन को तेज किया जाएगा। यदि इसके बावजूद सरकार ने पेंशनर्स की मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया तो विधानसभा के आगामी शीतकालीन सत्र के दौरान प्रदेशभर के पेंशनर्स शिमला कूच करेंगे। इस दौरान विधानसभा और सचिवालय के घेराव की चेतावनी भी दी गई है।
समिति अध्यक्ष ने कहा कि पेंशनर्स अपनी मांगों और हकों को लेकर आंदोलन जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से समय रहते मांगों पर बातचीत और समाधान की दिशा में कदम उठाया जाना चाहिए।
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