मंडी
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा पंचायत चुनाव के आरक्षण रोस्टर में डीसी (Direct Candidate/Nominee) को 5% कोटा देने के सरकारी फैसले को खारिज करने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इस फैसले का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर तीखा हमला बोला है।
सरकार का फैसला असंवैधानिक: जयराम ठाकुर
जयराम ठाकुर ने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय का यह आदेश सत्य की जीत है। उन्होंने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा:
सरकार का 5% कोटा देने का कदम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243(D) का सीधा उल्लंघन था।
विपक्ष ने विधानसभा के भीतर ही इस मुद्दे पर प्रदर्शन कर सरकार को चेताया था और कानूनी लड़ाई का ऐलान किया था।
मुख्यमंत्री न तो विशेषज्ञों की सलाह मान रहे हैं और न ही संविधान का सम्मान कर रहे हैं।
हर मोर्चे पर कोर्ट से मिली फटकार
नेता प्रतिपक्ष ने सिलसिलेवार ढंग से बताया कि कैसे सरकार ने चुनाव प्रक्रिया में बाधा डालने की कोशिश की:
चुनाव टालने का प्रयास: सरकार ने आपदा प्रबंधन कानून का सहारा लेकर चुनाव टालने की कोशिश की।
तबादलों की राजनीति: राज्य निर्वाचन आयोग में स्वतंत्र सचिव देने के बजाय मुख्यमंत्री कार्यालय के सेवा विस्तार प्राप्त अधिकारी को नियुक्त करने का प्रयास किया गया, जिस पर कोर्ट ने फटकार लगाई।
सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी: जब सरकार ने आपदा का हवाला देकर चुनाव रोकने की कोशिश की, तो सर्वोच्च न्यायालय ने पूछा कि यदि आपदा के बीच सरकार अपने 3 साल का जश्न मना सकती है, तो चुनाव क्यों नहीं करा सकती?
कांग्रेस के नेता देशभर में संविधान की दुहाई देते हैं, लेकिन जहां उन्हें सत्ता का मौका मिलता है, वहां वे संविधान की धज्जियां उड़ाने से पीछे नहीं हटते। मुख्यमंत्री की नीयत और नीति दोनों ही संवैधानिक नहीं हैं। — जयराम ठाकुर, नेता प्रतिपक्ष
न्यायालय का आगामी निर्देश
उच्च न्यायालय ने सरकार के पुराने रोस्टर को खारिज करते हुए अब नए सिरे से आरक्षण रोस्टर जारी करने के आदेश दिए हैं। गौरतलब है कि इससे पहले न्यायालय ने सरकार को 31 मई तक हर हाल में चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराने का निर्देश दिया है।
जयराम ठाकुर ने अंत में कहा कि सुक्खू सरकार चुनाव को प्रभावित करने की अपनी मंशा में कभी कामयाब नहीं होगी क्योंकि न्यायपालिका लोकतंत्र की रक्षा कर रही है।