काजा (लाहौल-स्पीति)
युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अंतर्गत 'माई भारत' तथा गृह मंत्रालय के संयुक्त सहयोग से स्पीति घाटी के काजा में 'विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम-2026' का सफल आयोजन किया जा रहा है।
एक सप्ताह के भ्रमण पर सीमांत गांव पहुंचे उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रतिभागियों के लिए दूसरे दिन का मुख्य विषय “भूगोल, पर्यावरण एवं सीमा जागरूकता” रहा। दिनभर चलीं विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को देश के सीमांत क्षेत्रों की भौगोलिक, सामरिक और पर्यावरणीय विशेषताओं से रूबरू कराया गया।
ITBP कैंप में स्वास्थ्य परीक्षण से हुई शुरुआत
कार्यक्रम के दूसरे दिन की शुरुआत 17वीं वाहिनी आईटीबीपी (ITBP) फॉरवर्ड बेस पोस्ट, काजा में प्रतिभागियों के व्यापक स्वास्थ्य परीक्षण के साथ हुई, जिसे एसीएमओ डॉ. विश्वेश सिंह द्वारा संपन्न किया गया।
इसके बाद निरीक्षक (जीडी) मस्तराम सिंह ने युवाओं को सीमा क्षेत्रों की सामरिक महत्ता, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सीमांत क्षेत्रों की सुरक्षा में तैनात बलों की भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी। वहीं निरीक्षक जगजीत सिंह ने एक विशेष सत्र में आधुनिक हथियारों व सुरक्षा उपकरणों की प्रदर्शनी लगाकर युवाओं को उनके तकनीकी पहलुओं से परिचित कराया।
आपदा प्रबंधन और जीवनरक्षक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण
आपातकालीन परिस्थितियों और आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए डॉ. विश्वेश सिंह ने सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) पर एक व्यावहारिक सत्र आयोजित किया।
इस दौरान प्रतिभागियों को आपातकाल में जान बचाने वाली तकनीकों का लाइव प्रशिक्षण दिया गया। दोपहर के भोजन के दौरान युवाओं को आईटीबीपी के जवानों और अधिकारियों के साथ सीधे संवाद करने का अवसर मिला, जिससे उन्होंने उच्च हिमालयी क्षेत्रों में देश की रक्षा करने वाले जवानों की चुनौतियों और उनके साहस को करीब से समझा।
खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों से बढ़ा सौहार्द
युवाओं और सुरक्षा बलों के बीच आपसी तालमेल को मजबूत करने के लिए खेल और मनोरंजक गतिविधियों का भी सहारा लिया गया। आईटीबीपी जवानों और माई भारत के प्रतिभागियों के बीच कुल पांच वॉलीबॉल मैच खेले गए, जिनमें से एक मिक्स्ड टीम मैच रहा। इसके साथ ही एक मैत्रीपूर्ण क्रिकेट मैच का भी आयोजन किया गया, जिसने माहौल में और अधिक सौहार्द भर दिया।
शीत मरुस्थल के पर्यावरण और दुर्लभ वन्यजीवों पर चर्चा
पर्यावरण संरक्षण सत्र के दौरान वन मंडलाधिकारी (DFO स्पीति रेंज) गोल्डी छाबड़ा ने लाहौल-स्पीति के अद्वितीय शीत मरुस्थलीय (Cold Desert) पारिस्थितिकी तंत्र पर विस्तृत प्रकाश डाला।
उन्होंने क्षेत्र के अल्पाइन फ्लोरा (स्थानीय वनस्पतियों) और हिम तेंदुआ, हिमालयन आइबेक्स, भरल (ब्लू शीप), हिमालयन भेड़िया, रेड फॉक्स जैसे वन्यजीवों के बारे में जानकारी दी। साथ ही उन्होंने ब्लैक-नेक्ड क्रेन, गोल्डन ईगल और स्नो पिजन जैसे दुर्लभ पक्षियों के संरक्षण पर चर्चा की और युवाओं के पर्यावरण से जुड़े सवालों के जवाब दिए।
'एक पेड़ वीर के नाम' अभियान के साथ समापन
कार्यक्रम के दौरान 17वीं वाहिनी आईटीबीपी के सहायक कमांडेंट एवं कमांडिंग ऑफिसर प्रवीण रावत ने भी युवाओं को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा प्रबंधन में आईटीबीपी की जिम्मेदारियों से अवगत कराया।
इस विशेष दिन का समापन आईटीबीपी परिसर में 'एक पेड़ वीर के नाम' थीम के तहत चलाए गए वृक्षारोपण अभियान के साथ हुआ। इस पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन स्पीति घाटी में युवा कार्यक्रम खेल मंत्रालय की ओर से लाहौल-स्पीति की जिला युवा अधिकारी प्रतिभा शर्मा, प्रदीप कुमार, अयांक कुहर और कार्तिक सिंगला द्वारा किया जा रहा है।