शिमला
हिमाचल प्रदेश में युवाओं के साथ-साथ युवतियों में भी बढ़ते नशे के प्रचलन को देखते हुए प्रदेश सरकार ने एक बेहद संवेदनशील कदम उठाया है। राज्य सरकार और हिमाचल प्रदेश पुलिस की एक अनूठी और संयुक्त पहल के तहत शिमला के मशौबरा में प्रदेश का पहला महिला नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र स्थापित किया गया है,
जिसे 'नवजीवन' नाम दिया गया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार को एक विशेष गरिमामयी समारोह के दौरान इस केंद्र का विधिवत लोकार्पण कर जनता को समर्पित किया। इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य नशे की दलदल में फंसी महिलाओं को मुख्यधारा में वापस लाना है।
कानून-व्यवस्था नहीं, यह एक सामाजिक चुनौती है: मुख्यमंत्री
इस अवसर पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने समाज में बढ़ती इस कुरीति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि नशे की समस्या केवल पुलिस और कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बहुत बड़ी सामाजिक चुनौती बन चुकी है।
इसके पूर्ण खात्मे के लिए समाज में संवेदनशीलता और पुनर्वास आधारित दृष्टिकोण अपनाना बेहद जरूरी है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार नशे के सौदागरों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' (जीरो बर्दाश्त) की नीति पर काम कर रही है, लेकिन जो लोग इसके शिकार हो चुके हैं, उन्हें इलाज और सहानुभूति की आवश्यकता है।
हिमाचल प्रदेश पुलिस करेगी केंद्र का संचालन
मशौबरा में शुरू किए गए इस विशेष पुनर्वास केंद्र का संचालन पूरी तरह से हिमाचल प्रदेश पुलिस द्वारा किया जाएगा। यहाँ नशे से पीड़ित महिलाओं के लिए केवल विषहरण (डीटॉक्सिफिकेशन) ही नहीं, बल्कि विभिन्न विशेषज्ञों की देखरेख में मनोवैज्ञानिक परामर्श (साइकोलॉजिकल काउंसलिंग),
जीवन कौशल विकास (लाइफ स्किल्स डेवलपमेंट) और पारिवारिक सहयोग की पुख्ता व्यवस्था की गई है। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रभावित महिलाएं पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद समाज में एक सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन जी सकें।