धर्मशाला।
भाजपा के वरिष्ठ प्रदेश प्रवक्ता त्रिलोक कपूर ने हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार द्वारा पेश किए गए बजट को 'विरोधाभासों का पुलिंदा' करार देते हुए सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि यह बजट धरातल पर शून्य है और केवल अखबारों की सुर्खियां बटोरने का एक जरिया मात्र है।
"गप्पों का कड़ाह और कोरा झूठ"
त्रिलोक कपूर ने अपनी चिर-परिचित शैली में तंज कसते हुए बजट की तुलना "बिना घी के कड़ाह" से की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने गप्पों का कड़ाह तो चढ़ा दिया, लेकिन विकास का घी डालना भूल गए। कपूर ने कहा कि 300 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा एक बड़ा छलावा है।
"एक अति गरीब परिवार, जिसके पास न हीटर है, न गीजर और न ही प्रेस, वह 300 यूनिट बिजली कभी खर्च ही नहीं कर सकता। उसे भाजपा सरकार की 125 यूनिट योजना से पहले ही लाभ मिल रहा था। अब BPL परिवारों की संख्या 70% घटाकर सरकार ने 1 लाख परिवारों का जो आंकड़ा पेश किया है, वह कोरा झूठ है।"
बजट के आकार पर उठाए सवाल
त्रिलोक कपूर ने आंकड़ों के जरिए सरकार को घेरते हुए कहा कि हिमाचल के इतिहास में पहली बार विकास का पहिया पीछे की ओर घूमा है। पिछले वर्ष बजट ₹58,514 करोड़ था, जिसे घटाकर इस बार ₹54,928 करोड़ कर दिया गया है।
कपूर ने सवाल किया कि जब बजट का आकार ही छोटा हो गया है, तो प्रदेश में विकास कार्यों के लिए पैसा कहाँ से आएगा? यह मुख्यमंत्री की प्रशासनिक विफलता का सीधा प्रमाण है।
महंगाई की 'डबल डोज' और सेस की लूट
भाजपा प्रवक्ता ने सरकार पर जनता की जेब काटने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह "गरीब का खून चूसने वाला बजट" है। डीजल-पेट्रोल पर ₹5 तक का उपकर (Cess) लगाने की तैयारी और दूध के दामों में ₹10 की बढ़ोतरी ने जनता को महंगाई की डबल डोज दी है।
आंगनबाड़ी और आशा वर्करों के मानदेय में ₹500 की बढ़ोतरी कर सरकार पीठ थपथपा रही है, लेकिन तेल और दूध के दाम बढ़ाकर उनसे महीने के ₹1200 वापस छीनने की साजिश रची गई है।
क्षेत्रीय भेदभाव का आरोप
त्रिलोक कपूर ने विधानसभा अध्यक्ष की हालिया वायरल टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा कि यह बजट पूरे हिमाचल का नहीं, बल्कि केवल देहरा और नादौन जैसे चुनिंदा क्षेत्रों का है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अन्य हिस्सों की अनदेखी इस बजट के हर पन्ने पर साफ झलकती है।