ऊना।
हिमाचल प्रदेश के बाजारों में इन दिनों 'हलाल' (Halal) प्रमाणित हरी इलायची की बिक्री ने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है। स्थानीय व्यापारियों और ग्राहकों द्वारा इस पर आपत्ति जताए जाने के बाद अब खाद्य सुरक्षा नियामक और प्रशासन हरकत में आ गया है।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में प्रदेश के ऊना और आसपास के जिलों के बाजारों में हरी इलायची के ऐसे पैकेट देखे गए, जिन पर प्रमुखता से 'हलाल सर्टिफाइड' का लोगो लगा हुआ है। चूंकि इलायची एक प्राकृतिक कृषि उत्पाद है, इसलिए इस पर हलाल प्रमाणीकरण की आवश्यकता और औचित्य को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर विरोध बढ़ने के बाद, लोगों ने यह सवाल उठाया है कि शाकाहारी श्रेणी में आने वाले मसालों के लिए इस तरह के धार्मिक प्रमाणीकरण की क्या जरूरत है।
प्राधिकरण की कार्रवाई और जांच
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) और प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो गया है। विभाग ने संबंधित जिलों के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे बाजारों से इन पैकेटों के सैंपल भरें।
शुरुआती जांच में यह देखा जा रहा है कि क्या यह लेबलिंग FSSAI के निर्धारित नियमों के तहत है या उपभोक्ताओं को भ्रमित करने का प्रयास किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यदि पैकेजिंग में नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो संबंधित कंपनी और वितरकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों और व्यापारियों की राय
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि कई कंपनियां खाड़ी देशों में निर्यात के लिए हलाल मार्क का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन उसी स्टॉक को भारतीय घरेलू बाजार में बेचना स्थानीय भावनाओं और नियमों के विपरीत हो सकता है। व्यापारिक संगठनों ने भी मांग की है कि केवल सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त FSSAI (वेजिटेरियन/नॉन-वेजिटेरियन) लोगो ही उत्पादों पर अनिवार्य होने चाहिए।