नाहन I
सिरमौर जिले के दुर्गम क्षेत्र शिलाई के युवाओं ने एक बार फिर खेल जगत में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। राजस्थान के जयपुर में आयोजित राष्ट्रीय स्तरीय पैराफेंसिंग (तलवारबाजी) प्रतियोगिता में शिलाई के अनिल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक (Bronze Medal) अपने नाम किया है।
वहीं, महिला वर्ग में शिलाई की ही सविता नेगी ने देशभर के टॉप-8 खिलाड़ियों में स्थान बनाकर प्रदेश का मान बढ़ाया है।
जयपुर में आयोजित इस नेशनल चैंपियनशिप में देश भर के 18 राज्यों के श्रेष्ठ खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। कड़े मुकाबलों के बीच अनिल ने अपनी चपलता और तकनीक से कांस्य पदक हासिल किया। अनिल वर्तमान में भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) गांधीनगर, गुजरात से पेशेवर प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। पदक जीतने के बाद अनिल का अगला लक्ष्य अब एशियन गेम्स में देश के लिए पदक जीतना है।
महिला वर्ग में सविता नेगी ने भी अपनी तलवारबाजी का जौहर दिखाया। संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर टॉप-8 में जगह बनाई। सविता ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में अभ्यास की सुविधाएं न के बराबर हैं, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है।
सफलता के जश्न के बीच खिलाड़ियों ने प्रदेश की खेल नीति और सुविधाओं पर अपनी पीड़ा भी साझा की। हिमाचल में फेंसिंग जैसे खेलों के लिए बुनियादी सुविधाओं और कोचिंग की भारी कमी है।
प्रशिक्षण के लिए हमें दिल्ली या गुजरात जैसे राज्यों का रुख करना पड़ता है। सरकार को चाहिए कि प्रदेश में भी आधुनिक खेल परिसर और कोच उपलब्ध कराए जाएं ताकि हमें बाहर न भटकना पड़े। — अनिल, कांस्य पदक विजेता
अनिल और सविता ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले दिव्यांग खिलाड़ियों को उचित प्रोत्साहन राशि दी जाए। उन्होंने कहा कि आर्थिक मदद मिलने से खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ता है और वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक मेहनत कर देश का नाम रोशन कर सकते हैं।