शिमला।
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला स्थित बचत भवन परिसर में शनिवार को जिला परिषद के नवनिर्वाचित सदस्यों के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान जमकर हंगामा और राजनीतिक ड्रामा हुआ।
जिला परिषद में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने के कारण अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद को लेकर सियासी सरगर्मियां पहले से ही चरम पर थीं, लेकिन शनिवार सुबह हुए इस घटनाक्रम ने माहौल को और ज्यादा गरमा दिया।
स्थिति इस कदर तनावपूर्ण हो गई कि जब उपायुक्त (DC) एवं जिला निर्वाचन अधिकारी शपथ दिलाने पहुंचे, तो पुलिस को सुरक्षा घेरा बनाकर उन्हें धक्कामुक्की के बीच अंदर ले जाना पड़ा।
निर्दलीयों के हाथ में सत्ता की चाबी, अंदर जाने को लेकर भड़का विवाद
दरअसल, शिमला जिला परिषद की कुल 25 सीटों में से भाजपा के पास 11 और कांग्रेस के पास 10 सीटें हैं, जबकि 4 निर्दलीय सदस्य यहाँ निर्णायक भूमिका में हैं। बहुमत की चाबी निर्दलीयों के पास होने के कारण दोनों ही दल लगातार गोटियां फिट करने में जुटे हैं।
शनिवार सुबह 11 बजे जैसे ही शपथ ग्रहण समारोह शुरू होने वाला था, तभी आरोप लगा कि कार्यक्रम स्थल पर मौजूद भाजपा के पूर्व मंत्रियों, पार्टी पदाधिकारियों और समर्थकों को सभागार से बाहर जाने के लिए कह दिया गया। इसी बात से नाराज होकर भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बचत भवन के बाहर जोरदार नारेबाजी और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया।
पुलिस को करनी पड़ी कड़ी मशक्कत, अब अध्यक्ष पद के चुनाव पर टिकी नजरें
बचत भवन के मुख्य द्वार पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच काफी देर तक तीखी बहस और धक्कामुक्की का दौर चलता रहा, जिससे परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि, भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की तत्परता से स्थिति को समय रहते नियंत्रित कर लिया गया और नवनिर्वाचित सदस्यों की शपथ ग्रहण प्रक्रिया को शांतिपूर्ण ढंग से
संपन्न कराया गया। इस हंगामे ने साफ संकेत दे दिए हैं कि आने वाले दिनों में जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद का चुनाव बेहद दिलचस्प और कांटे का होने वाला है। अब दोनों ही दलों की नजरें उन चार निर्दलीय सदस्यों पर टिकी हैं, जिनका रुख तय करेगा कि शिमला जिला परिषद का ताज किसके सिर सजेगा।