कांगड़ा
हिमाचल प्रदेश और पड़ोसी राज्य पंजाब के कई हिस्सों में शुक्रवार रात उस समय भारी दहशत फैल गई, जब धरती जोरदार ढंग से डोल उठी। शुक्रवार रात ठीक 10:04 बजे आए इस तेज भूकंप के झटके से लोग घबरा गए और सोए हुए लोग भी तुरंत अपने घरों और ऊंची इमारतों से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागे।
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 5.0 मापी गई है। गनीमत यह रही कि इस तेज झटके के बावजूद देर रात तक कहीं से भी किसी बड़े जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है।
चंबा-कांगड़ा बॉर्डर पर था केंद्र, जमीन से सिर्फ 5 किमी नीचे मची हलचल
वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस भूकंप का केंद्र चंबा और कांगड़ा जिले की सीमा के पास धर्मशाला क्षेत्र में जमीन के भीतर महज 5 किलोमीटर की गहराई पर था। विशेषज्ञों का कहना है कि जब भूकंप का केंद्र जमीन की कम गहराई पर होता है, तो उसका कंपन सतह पर बहुत तेज और विनाशकारी महसूस होता है।
यही वजह रही कि 5.0 की तीव्रता वाले इस झटके ने कांगड़ा, चंबा, धर्मशाला, पालमपुर, बैजनाथ और मंडी सहित प्रदेश के एक बड़े हिस्से को हिलाकर रख दिया। इसके झटके पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में भी स्पष्ट रूप से महसूस किए गए।
पिछले दो दशकों में सबसे तेज झटका, बढ़ी चिंता
हिमाचल प्रदेश में पिछले दो दशकों (20 साल) के आंकड़ों पर नजर डालें, तो यहाँ आने वाले अधिकांश भूकंपों की तीव्रता अमूमन 2.0 से 4.0 रिक्टर स्केल के बीच ही दर्ज की जाती रही है।
इस लिहाज से शुक्रवार रात का यह झटका अपेक्षाकृत बहुत अधिक तीव्र और डराने वाला था। हाल के दिनों में लगातार आ रहे छोटे-छोटे भूकंपों के बीच इस 5.0 तीव्रता के झटके ने भू-वैज्ञानिकों और स्थानीय लोगों को एक बार फिर किसी बड़े भूकंप की आशंका को लेकर चिंतित कर दिया है।
1905 की विनाशकारी यादें हुईं ताजा: जोन-5 में आता है कांगड़ा
इस भूकंप ने एक बार फिर कांगड़ा घाटी के इतिहास के उस काले पन्ने की याद दिला दी है, जिसे सोचकर आज भी लोग कांप उठते हैं। उल्लेखनीय है कि कांगड़ा जिला भूकंप की दृष्टि से देश के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल है और इसे भूकंपीय जोन-5 (Seismic Zone 5) में रखा गया है।
वर्ष 1905 में कांगड़ा में 7.8 रिक्टर स्केल की तीव्रता का एक महाविनाशकारी भूकंप आया था। उस आपदा में करीब 20 हजार लोगों ने अपनी जान गंवाई थी और हजारों ऐतिहासिक भवन व आशियाने ताश के पत्तों की तरह ढह गए थे।
यही कारण है कि यहाँ छोटा सा झटका भी लोगों के मन में गहरी दहशत पैदा कर देता है। फिलहाल, आपदा प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन की टीमें पूरी तरह अलर्ट पर हैं और संवेदनशील इलाकों में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।