71 ग्राम अफीम बरामदगी के NDPS मामले में कार्रवाई, आरोपी और सहयोगियों की जमीन, दुकान, वाहन व बैंक खातों की संपत्ति जब्त
शिमला पुलिस ने नशा तस्करों के खिलाफ आर्थिक मोर्चे पर बड़ी कार्रवाई करते हुए ठियोग के एक NDPS मामले में ₹1.64 करोड़ से अधिक मूल्य की चल-अचल और वित्तीय संपत्तियां सीज की हैं। पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई नशे के अवैध कारोबार से अर्जित कथित आय पर शिकंजा कसने के उद्देश्य से की गई है।
जानकारी के अनुसार, पुलिस थाना ठियोग में 10 जून 2026 को FIR संख्या 77/2026 दर्ज की गई थी। मामले में आरोपी सोहन लाल उर्फ हैपी की रहीघाट स्थित नाई की दुकान से करीब 71 ग्राम अफीम बरामद की गई थी। जांच के दौरान पुलिस को आरोपी के लंबे समय से ठियोग, कोटखाई, रोहड़ू और आसपास के क्षेत्रों में अफीम की कथित तस्करी में शामिल होने की जानकारी मिली।
वित्तीय जांच में सामने आई करोड़ों की संपत्ति
मामले की आगे की जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी और उसके सहयोगियों की संपत्तियों तथा आय के स्रोतों का वित्तीय विश्लेषण किया। जांच में एक आवासीय प्लॉट, कृषि भूमि, दो मंजिला दुकान, वाहन तथा बैंक और डाकघर खातों में जमा धनराशि सहित कुल ₹1.64 करोड़ से अधिक की संपत्तियों की पहचान की गई।
पुलिस के अनुसार, प्रथम दृष्टया ये संपत्तियां नशे के कथित अवैध कारोबार से अर्जित आय से जुड़ी पाई गईं। इसके बाद संबंधित संपत्तियों को NDPS एक्ट के तहत सीज कर दिया गया।
2026 में 12 NDPS मामलों में ₹8 करोड़ से अधिक की संपत्ति सीज
शिमला पुलिस के मुताबिक, वर्ष 2026 में अब तक 12 NDPS मामलों में वित्तीय जांच के आधार पर ₹8 करोड़ से अधिक की चल-अचल और वित्तीय संपत्तियों को सीज किया जा चुका है।
पुलिस ने बताया कि वर्ष 2024 और 2025 में NDPS मामलों के तहत इस तरह की वित्तीय जांच अथवा संपत्ति सीज करने की कार्रवाई नहीं की गई थी। इस साल नशे के खिलाफ कार्रवाई में आर्थिक नेटवर्क को भी जांच के दायरे में लाया जा रहा है।
नशे के कारोबार से अर्जित संपत्ति पर भी शिकंजा
शिमला पुलिस का कहना है कि नशे के खिलाफ अभियान अब केवल नशीले पदार्थों की बरामदगी और आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगा। नशे के अवैध कारोबार से अर्जित कथित संपत्तियों की पहचान कर उनके खिलाफ भी कार्रवाई जारी रखी जाएगी।
पुलिस के अनुसार, आर्थिक नेटवर्क पर कार्रवाई का उद्देश्य नशा तस्करी से जुड़े लोगों की अवैध कमाई के स्रोत पर प्रहार करना और नशे के कारोबार को आर्थिक रूप से कमजोर करना है।
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