शिमला।
शिमला पुलिस द्वारा मादक पदार्थों के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत एक महत्वपूर्ण कामयाबी हासिल की गई है। पुलिस ने रोहडू क्षेत्र में सक्रिय चिट्टा तस्करी गिरोह के मुख्य संचालक (Kingpin) को चंडीगढ़ से गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला 15 मार्च 2026 को तब शुरू हुआ जब पुलिस थाना रोहडू की टीम गश्त पर थी। इस दौरान 29 वर्षीय सार्थक (पुत्र संदीप सूद), निवासी समाला, रोहडू को संदिग्ध अवस्था में पकड़ा गया।
तलाशी के दौरान उसके कब्जे से 9.17 ग्राम हेरोइन (चिट्टा) बरामद हुई। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए FIR No. 26/26 के तहत ND&PS Act की धारा 21-61-85 के अंतर्गत मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
वित्तीय और डिजिटल साक्ष्यों से हुआ बड़ा खुलासा
गिरफ्तारी के बाद शिमला पुलिस ने मामले की तह तक जाने के लिए 'बैकवर्ड लिंकेज' (Backward Linkage) पर ध्यान केंद्रित किया। जांच टीम ने आरोपी के बैंक खातों के लेन-देन, टेलीकॉम रिकॉर्ड (CDR), और मोबाइल फोन का गहन वैज्ञानिक व तकनीकी विश्लेषण किया।
इस जांच से यह स्पष्ट हुआ कि रोहडू और चिड़गांव क्षेत्र में एक संगठित गिरोह सक्रिय है, जिसका संचालन उत्तर प्रदेश से हो रहा है।
लखनऊ से संचालित हो रहा था 'लोकेशन बेस्ड' गिरोह
पुलिस जांच में गिरोह के मुख्य सरगना की पहचान अमित गुप्ता (पुत्र तेज नारायण गुप्ता), निवासी बाराबंकी (लखनऊ), उम्र 30 वर्ष के रूप में हुई। आरोपी अमित गुप्ता लखनऊ में बैठकर इस अवैध कारोबार को नियंत्रित कर रहा था।
आरोपी अमित गुप्ता, सार्थक जैसे स्थानीय युवकों का उपयोग कर अलग-अलग स्थानों पर चिट्टे की 'लोकेशन बेस्ड डिलीवरी' करवाता था। वह कम मात्रा में नशा छिपवाकर उसकी खरीद-फरोख्त का नेटवर्क चला रहा था ताकि पुलिस की नजरों से बचा जा सके।
चंडीगढ़ से हुई गिरफ्तारी
आरोपी की तलाश में शिमला पुलिस की एक विशेष टीम को लखनऊ भेजा गया था, परंतु आरोपी वहां से फरार होने में सफल रहा। पुलिस ने हार न मानते हुए तकनीकी निगरानी जारी रखी और अंततः 11 अप्रैल 2026 को आरोपी अमित गुप्ता को चंडीगढ़ से दबोच लिया।
वर्तमान स्थिति
पुलिस ने आरोपी अमित गुप्ता को माननीय अदालत में पेश किया, जहाँ से उसे 14 अप्रैल 2026 तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों और वित्तीय नेटवर्क के बारे में पूछताछ कर रही है।
शिमला पुलिस नशे के सौदागरों के विरुद्ध 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर काम कर रही है। हमारा लक्ष्य केवल छोटे तस्करों तक सीमित रहना नहीं, बल्कि उनके मुख्य स्रोतों (Main Suppliers) को जड़ से उखाड़ना है।