शिमला
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहाँ वृद्धावस्था पेंशन (Old Age Pension) का लाभ ले रहे लाभार्थियों के दस्तावेजों की स्क्रूटनी (जांच) के दौरान एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।
शुरुआती जांच में ही 50 से अधिक ऐसे लाभार्थी पाए गए हैं, जिन्होंने जाली दस्तावेजों के सहारे सालों तक सरकारी धन का दुरुपयोग किया। विभाग द्वारा इस खुलासे के बाद हड़कंप मच गया है।
ऐसे हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा
मिली जानकारी के अनुसार, विभाग द्वारा समय-समय पर की जाने वाली पात्रता जांच और ऑडिट प्रक्रिया के दौरान यह गड़बड़ी पकड़ी गई है। जब संबंधित अधिकारियों ने पेंशन धारकों के आयु प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेजों का जमीनी स्तर पर मिलान किया, तो कई गंभीर विसंगतियां सामने आईं।
50 से अधिक मामलों में पाया गया कि कई लोगों ने पेंशन हथियाने के लिए अपनी उम्र बढ़ाकर दिखाई थी, जबकि कई अन्य लोग वित्तीय रूप से पूरी तरह सक्षम होने के बावजूद इस योजना का अवैध लाभ उठा रहे थे।
अयोग्य घोषित कर रोकी गई पेंशन, होगी रिकवरी
विभागीय सूत्रों के अनुसार, इन सभी संदिग्ध और फर्जी पाए गए लाभार्थियों की पेंशन को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है। प्रशासन अब इन सभी अपात्र लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी करने की तैयारी में है। इसके साथ ही, इनके द्वारा अब तक उठाई गई पेंशन राशि की गणना कर सरकारी खजाने में इसकी रिकवरी (वसूली) की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।
सामाजिक सुरक्षा पेंशन केवल समाज के जरूरतमंद और पात्र बुजुर्गों के लिए है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इसका लाभ लेना एक गंभीर वित्तीय अपराध है। चिन्हित किए गए 50 से अधिक मामलों की विस्तृत फाइल तैयार की गई है और अपात्रों से पाई-पाई वसूली जाएगी। इसके अलावा, इस जालसाजी में मददगार रहे कर्मचारियों या बिचौलियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
जांच का दायरा बढ़ने की उम्मीद
प्रशासनिक अमले का मानना है कि यह आंकड़ा सिर्फ एक शुरुआत हो सकता है। शिमला जिला और आसपास के ब्लॉकों में चल रही इस व्यापक जांच के बाद आने वाले दिनों में कई और फर्जी लाभार्थियों के नाम सामने आने की पूरी संभावना है। इस कार्रवाई से उन लोगों में हड़कंप है जिन्होंने गलत तरीके से पेंशन मंजूर करवाई थी।