पूर्वजों की शांति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के लिए पहुंचे श्रद्धालु, भजन-कीर्तन से भक्तिमय हुआ घाट
भाद्रपद मास शुरू होते ही गोबिंद सागर झील के किनारे स्थित ऋषिकेश घाट पर धार्मिक आस्था का नजारा देखने को मिल रहा है। अपने जीवन की नैया पार लगाने और पूर्वजों की शांति की कामना के लिए इन दिनों सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर परंपरागत रूप से बेड़ा तार रहे हैं।
शुक्रवार को भी ऋषिकेश घाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और दिनभर धार्मिक गतिविधियों का सिलसिला जारी रहा।
दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने घाट पर विधिवत पूजा-अर्चना की। परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना के साथ श्रद्धालुओं ने धार्मिक रस्में पूरी करते हुए बेड़ा तारने की परंपरा निभाई। कई परिवार सामूहिक रूप से घाट पर पहुंचे और पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धा के साथ इस परंपरा को पूरा किया।
घाट पर धार्मिक माहौल उस समय और भी भक्तिमय हो गया, जब महिलाओं के समूह भजन-कीर्तन में जुट गए। महिलाएं समूह में बैठकर भजन गाती नजर आईं, जबकि कई स्थानों पर श्रद्धालु भजनों की धुन पर नृत्य करते भी दिखाई दिए। पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच पूरा घाट आस्था और श्रद्धा से सराबोर नजर आया।
पंडित रवि दत्त ने बताया कि बेड़ा तारने की परंपरा सदियों पुरानी है। धार्मिक मान्यता के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में बेड़ा तारना चाहिए। उन्होंने बताया कि हिंदू धर्म में मान्यता है कि मृत्यु के बाद जीव को वैतरणी नदी को पार करना पड़ता है। जीवित रहते बेड़ा तारने का पुण्य कार्य करने से मृत्यु के बाद वैतरणी नदी और भवसागर को पार करने में सहायता मिलती है।
भाद्रपद मास में इस धार्मिक परंपरा को निभाने के लिए हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग ऋषिकेश घाट पहुंचते हैं। शुक्रवार को भी सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था, जो देर शाम तक जारी रहा। घाट पर पहुंचे लोगों ने पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ धार्मिक परंपरा निभाते हुए परिवार की सुख-समृद्धि और पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
follow us on facebook
subscribe to us on youtube