राजा का तालाब में प्रदेश पौंग बांध विस्थापित समिति की बैठक; श्रीगंगानगर में आरक्षित 2.25 लाख एकड़ भूमि में 1,188 मुरब्बों पर कथित कब्जे का आरोप
फतेहपुर की उपतहसील राजा का तालाब में प्रदेश पौंग बांध विस्थापित समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में पौंग बांध विस्थापितों ने 55 वर्षों से लंबित अपने अधिकारों को लेकर नाराजगी जताई।
विस्थापितों का कहना है कि देश के विकास के लिए उन्होंने अपनी उपजाऊ जमीन, घर और गांव तक छोड़ दिए। पौंग बांध से बिजली उत्पादन हुआ और कई राज्यों को सिंचाई के लिए पानी मिला, लेकिन बांध के लिए विस्थापित हुए परिवार आज भी अपने अधिकार की जमीन के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
श्रीगंगानगर की आरक्षित जमीन पर कब्जे का आरोप
समिति ने आरोप लगाया कि श्रीगंगानगर में पौंग बांध विस्थापितों के लिए आरक्षित करीब 2 लाख 25 हजार एकड़ भूमि में से 1,188 मुरब्बों पर कथित रूप से भू-माफिया का कब्जा है।
विस्थापितों ने सवाल उठाया कि जब यह भूमि उनके पुनर्वास के लिए आरक्षित की गई थी तो उस पर दूसरे लोगों का कब्जा कैसे हो गया।
समिति के प्रधान हंस राज चौधरी ने कहा कि विस्थापित किसी दूसरे की जमीन नहीं मांग रहे हैं, बल्कि अपने अधिकार की जमीन मांग रहे हैं। उन्होंने सरकार से आरक्षित भूमि की स्थिति स्पष्ट करने और कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
हर सरकार ने दिए आश्वासन, नहीं मिला अधिकार
बैठक में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि पिछले 55 वर्षों में अलग-अलग सरकारों की ओर से विस्थापितों को केवल आश्वासन दिए गए, लेकिन उन्हें उनका अधिकार नहीं मिला।
विस्थापितों ने राजस्थान सरकार, केंद्र सरकार और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि चुनाव के दौरान बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद उनकी समस्याओं को भुला दिया जाता है।
‘अब वादे नहीं, न्याय चाहिए’
पौंग बांध विस्थापित रमेश शर्मा ने कहा कि उनके बुजुर्ग न्याय की उम्मीद में दुनिया से चले गए और अब अगली पीढ़ी भी इंतजार कर रही है।
उन्होंने कहा कि देशहित में अपनी जमीन और घर छोड़ना उनका कसूर नहीं था। अब विस्थापितों को आश्वासन नहीं, बल्कि न्याय चाहिए।
केंद्रीय मंत्री से हस्तक्षेप की मांग
बैठक में केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से भी मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की गई। समिति ने कहा कि विस्थापितों को जैसलमेर की बंजर भूमि नहीं चाहिए, बल्कि श्रीगंगानगर में उनके नाम आरक्षित भूमि पर अधिकार चाहिए।
विस्थापितों ने चेतावनी दी कि यदि सरकारों ने उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
अधिकार मिलने तक जारी रहेगा संघर्ष
पौंग बांध विस्थापित मनोहर लाल विश्वकर्मा ने कहा कि उनकी लड़ाई किसी सरकार या नेता के खिलाफ नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि देश के लिए अपना सब कुछ खोने के बाद भी उन्हें केवल इंतजार मिला है।
समिति ने स्पष्ट किया कि हर पात्र विस्थापित को उसका अधिकार मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा।
पौंग बांध से बिजली बनी, राजस्थान के खेतों तक पानी पहुंचा और विकास को गति मिली, लेकिन परियोजना के लिए अपनी जमीन और घर गंवाने वाले विस्थापित आज भी न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। राजा का तालाब की बैठक में एक बार फिर सरकारों से उनके अधिकार और आरक्षित जमीन को लेकर ठोस कार्रवाई की मांग उठी है।
follow us on facebook
subscribe to us on youtube