एमएस डीडीयू डॉ. लोकेंद्र शर्मा बोले- कम उम्र में अनुचित सामग्री देख रहे बच्चे, बढ़ता नशा भी मानसिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती
हिमाचल प्रदेश में बदलती जीवनशैली के बीच बच्चों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया का अत्यधिक इस्तेमाल बच्चों के व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।
डीडीयू अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लोकेंद्र शर्मा ने कहा कि बच्चों का स्क्रीन टाइम लगातार बढ़ रहा है। कम उम्र में बच्चे इंटरनेट और मोबाइल पर ऐसी सामग्री भी देख रहे हैं, जो उनकी उम्र के लिहाज से उचित नहीं है। इसका उनके व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
उन्होंने अभिभावकों से बच्चों के मोबाइल और इंटरनेट इस्तेमाल पर नजर रखने के साथ उन्हें पर्याप्त समय देने की अपील की।
नशा भी मानसिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती
डॉ. शर्मा ने युवाओं में बढ़ते नशे को भी मानसिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि नशे की गिरफ्त में आने वाले युवाओं में मानसिक तनाव, अवसाद और व्यवहार संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
ऐसे मामलों में परिवार और समाज की ओर से समय रहते हस्तक्षेप करना जरूरी है, ताकि समस्या गंभीर होने से पहले उचित मदद उपलब्ध कराई जा सके।
विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों के व्यवहार में अचानक बदलाव मानसिक परेशानी का संकेत हो सकता है। चिड़चिड़ापन, अकेले रहना, पढ़ाई में रुचि कम होना, नींद में बदलाव और लगातार उदास रहना जैसे लक्षणों पर अभिभावकों को ध्यान देना चाहिए।
बच्चों से डांटने के बजाय दोस्ताना माहौल में बातचीत करने और उनकी समस्याओं को समझने का प्रयास करना जरूरी है।
मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता जरूरी
डॉ. लोकेंद्र शर्मा ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है। डिप्रेशन जैसी समस्याओं को छिपाने या नजरअंदाज करने के बजाय समय पर विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि परिवार का सहयोग, सही मार्गदर्शन और समय पर उपचार मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से उबरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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