मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा, आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने हिमाचल प्रदेश के विद्युत क्षेत्र से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण और लंबित मामलों को केंद्रीय मंत्री के समक्ष रखा।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के निःशुल्क विद्युत हिस्से की एवज में नवीकरणीय ऊर्जा प्रमाण-पत्र उपलब्ध करवाने, सतलुज जल विद्युत निगम के निदेशक मंडल में हिमाचल की ओर से दो स्वतंत्र निदेशकों के नामांकन और शानन जल विद्युत परियोजना को प्रदेश को हस्तांतरित करने का मामला प्रमुखता से उठाया।
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2008 की जलविद्युत नीति लागू होने से पहले शुरू हुई केंद्रीय क्षेत्र की जलविद्युत परियोजनाओं के लिए परियोजना शुरू होने के बाद स्थानीय क्षेत्र विकास निधि के रूप में एक प्रतिशत अतिरिक्त मुफ्त बिजली देने की मांग भी दोहराई।
उन्होंने 180 मेगावाट क्षमता वाली बैरा स्यूल जल विद्युत परियोजना को 40 वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद हिमाचल को सौंपने तथा बीबीएमबी की प्रदेश में ऐसी अधिकृत भूमि, जिसका वर्तमान में उपयोग नहीं हो रहा है, उसे राज्य सरकार को उपलब्ध करवाने का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री के अनुसार इस भूमि का उपयोग सरकारी कार्यालयों के निर्माण और परियोजनाओं से विस्थापित लोगों के पुनर्वास के लिए किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि जलविद्युत क्षेत्र हिमाचल की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और स्थानीय विकास का महत्वपूर्ण आधार है, इसलिए प्रदेश के विद्युत हितों से जुड़े लंबित मामलों का जल्द समाधान जरूरी है।
उन्होंने बताया कि अतिरिक्त मुफ्त बिजली की व्यवस्था से राज्य को आर्थिक लाभ के साथ परियोजना प्रभावित क्षेत्रों के विकास में भी मदद मिलेगी। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने मुख्यमंत्री द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों पर सकारात्मक रूप से विचार करने का आश्वासन दिया।
बैठक में मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार और मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर भी मौजूद रहे।
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